हर दिन गुजरते 40 हजार वाहन, 100 से अधिक गड्ढे और हर ज्वाइंट पर गैप...कानपुर के गंगा पुल की बदहाली बनी खतरे की घंटी, दहशत में रहते हैं गुजरने वाले लोग
कानपुर-लखनऊ-उन्नाव को जोड़ने वाला जाजमऊ गंगा पुल इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 700 मीटर लंबे इस महत्वपूर्ण पुल पर सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
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कानपुर-लखनऊ-उन्नाव को जोड़ने वाला जाजमऊ गंगा पुल इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 700 मीटर लंबे इस महत्वपूर्ण पुल पर सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। कई स्थानों पर पुल के अंदर की सरिया बाहर दिखाई देने लगी हैं, जबकि लगभग हर जॉइंट पर बड़े-बड़े गैप बन गए हैं। कुछ जगहों पर गैप इतने बड़े हैं कि उनमें एक व्यक्ति तक आसानी से जा सकता है। इन हिस्सों को ढकने के लिए जगह-जगह बड़ी सीमेंटेड चटियां रखकर काम चलाया जा रहा है।
पुल की सबसे बड़ी समस्या इसकी बेयरिंग को लेकर सामने आई है। लंबे समय से भारी वाहनों का दबाव झेल रहे पुल की कई बेयरिंग खराब हो चुकी हैं। पुल में बढ़ते कंपन और जर्जर स्थिति को देखते हुए अब बेयरिंग बदलने और आवश्यक मरम्मत की तैयारी की जा रही है। हालांकि सवाल यह है कि जिस पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, उसकी हालत इतनी खराब कैसे हो गई?
जाजमऊ गंगा पुल पर मंडरा रहा खतरा
जाजमऊ गंगा पुल कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन की प्रमुख कड़ी है। इस मार्ग से रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में पुल की मौजूदा हालत न केवल राहगीरों, बल्कि यातायात व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुकी है। पुल पर दिखाई दे रही दरारें, खुले गैप और बाहर निकली सरिया वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।
खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पुल के ठीक नीचे गंगा का बहाव है। यदि जर्जर हिस्से के कारण कोई बड़ा हादसा होता है तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल से गुजरते समय हर वक्त डर बना रहता है। भारी वाहनों के गुजरने पर होने वाला कंपन इस चिंता को और बढ़ा देता है।
मंडलायुक्त के विजेंद्र पंडियन का कहना है कि पुल की स्थिति उनके संज्ञान में है और पुल काफी जर्जर है। किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए आवश्यक आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं और मरम्मत का काम शुरू करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि काम शुरू होने की स्थिति में यातायात के लिए डायवर्जन करना पड़ेगा और इसमें करीब 90 दिन का समय लग सकता है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पुल की बदहाली ने निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे थे। अब जाजमऊ पुल की स्थिति ने भी संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों का सवाल है कि क्या पुल के निर्माण और वर्षों तक रखरखाव में लापरवाही बरती गई? क्या समय रहते पुल की खामियों को दूर किया गया? पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। हालांकि किसी भी भ्रष्टाचार की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन पुल की जर्जर तस्वीरें जिम्मेदार तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करती हैं।
पुल पर 100 से अधिक गड्ढे, रोज गुजरते हैं करीब 40 हजार वाहन
कानपुर-उन्नाव को जोड़ने वाले इस पुल पर 100 से अधिक गड्ढे हैं। कई जगह सड़क टूटने से सरिया बाहर निकल आई है। रोज करीब 40 हजार वाहन इसी पुल से गुजरते हैं।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 22 August 2026 at 14:33 IST