3 महीने, 400 लोग और 100 करोड़ का ट्रांजेक्शन...कानपुर में पकड़ा गया 'सट्टे का इंटरनेशनल सिंडिकेट'; OLA-Uber में बैठ होता था 'काला कांड'
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है।
गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना बर्रा पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बर्रा क्षेत्र में कुछ संदिग्ध लोग साइबर ठगी की नई योजना बना रहे हैं।
इसके बाद पुलिस ने प्राचीन शिव मंदिर, बर्रा-6 के पास घेराबंदी कर चार आरोपियों को मौके से दबोच लिया। पूछताछ के आधार पर फरार चार अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क भारत से बाहर संचालित हो रहा था। गिरोह के सरगना दुबई, कंबोडिया और थाईलैंड से पूरे सिंडिकेट को कंट्रोल कर रहे थे। करीब 400 लोगों का यह नेटवर्क अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रहा था, जिससे इसकी संगठित और व्यापक संरचना सामने आई है।
ऐसे चलता था ठगी का पूरा खेल
आरोपी प्रतिबंधित गेमिंग ऐप और वेबसाइट के जरिए लोगों को फंसाते थे। शुरुआत में छोटी रकम जिताकर भरोसा जीतते, फिर बड़ी रकम लगवाकर “मास्टर आईडी” के जरिए गेम हरवा देते थे। ठगी की रकम तथाकथित विजेताओं के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। लोगों को फंसाने के लिए डार्क वेब और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।
ओला कैब में बैठकर ऑपरेशन
गिरोह के सदस्य पुलिस से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाते थे। वे ओला कैब में बैठकर ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और कैश निकासी करते थे, ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके और जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
फर्जी खातों का जाल
आरोपी भोले-भाले लोगों को बहलाकर उनके आधार कार्ड और सिम कार्ड हासिल कर लेते थे। इन्हीं दस्तावेजों के जरिए फर्जी बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से सैकड़ों संदिग्ध खातों की जानकारी मिली है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 26 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 54 एटीएम कार्ड, 26 पासबुक, 1 चेकबुक, 30 सिम कार्ड और दो वाहन (स्कूटी व बाइक) बरामद किए हैं। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने महज 3 महीनों में करीब 100 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया। फिलहाल 50 लाख रुपये के लेनदेन की पुष्टि के बाद उसे फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 14 April 2026 at 10:59 IST