अब शादी में खुशी मनाना भी गुनाह? देवबंद के मौलाना ने मुस्लिम शादियों में महिलाओं के नाच-गाने पर उठाए सवाल

देवबंद के मशहूर उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने मुस्लिम शादियों में बढ़ते नाच-गाने, ढोल-बाजे और महिलाओं के बे-पर्दा होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे इस्लाम की पवित्र सुन्नत का मजाक बनाने और दिखावे की होड़ करार दिया।

 
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Saharanpur News : देवबंद के मशहूर उलेमा और जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक (Jamiat Dawat-ul-Muslimeen) मौलाना कारी इसहाक गोरा (Maulana Qari Ishaq Gora) ने एक वीडियो जारी कर मुस्लिम शादियों में बढ़ते नाच-गाने, ढोल-बाजे, आतिशबाजी और महिलाओं के बे-पर्दा होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे इस्लाम की पवित्र सुन्नत का मजाक बनाने और दिखावे की होड़ करार दिया।

मौलाना कारी इसहाक के इस बयान ने नई बहस छेड़ दी है। इस्लाम में निकाह एक पवित्र और सादगी भरा अमल है, जो सुन्नत-ए-नबवी पर आधारित है। मौलाना ने शादी जैसे खुशी के मौके पर लड़कियों के नाच गाने को शरीयत के खिलाफ बताया है। मौलाना ने कहा, “जब वह मदरसों-मस्जिदों के पास से बारात गुजरते देखते हैं, तो ढोल की थाप, नाचते लोग और बिना पर्दे की लड़कियां देखकर सोच में पड़ जाते हैं कि ये इस्लाम है या कुछ और?”

समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील

मौलाना कारी इसहाक गोरा ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि इन गलत रस्मों पर रोक लगाने की कोशिश की जाए। शरीयत में संगीत, डांस और मिश्रित मेल-जोल को हराम करार दिया गया है। महिलाओं के लिए पर्दा और पुरुषों के लिए निगाह की हिफाजत अनिवार्य है। मौलाना ने जोर देकर कहा कि इस्लाम ने निकाह को आसान और बरकत वाला बनाया है, न कि बोझ और फिजूलखर्ची का जरिया।

मौलाना कारी इसहाक गोरा समय-समय पर ऐसे सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। उनका मानना है कि मुस्लिम समाज को कुरान और सुन्नत की तरफ लौटना चाहिए।

मौलाना के बयान से उठे सवाल

मौलाना के बयान से सवाल उठने लगा है कि क्या शादी में खुशी जाहिर करना अब हराम हो गया? पहले डीजे हराम, आतिशबाजी हराम, अब नाच-गाना और लड़कियों का बाहर निकलना भी चिंता का सबब। शादी तो खुशी का मौका है, थोड़ा ढोल बजे, लोग थिरकें, दुल्हन-दुल्हा मुस्कुराएं इसमें भला क्या बुराई? अगर शादी भी पर्दे में और खामोशी में हो, तो घर की महिलाएं कब अपनी खुशी का इजहार करेंगी? फिजूलखर्ची और दिखावा रोकना तो ठीक है, लेकिन खुशी मनाने पर सवाल उठाना कितना सही है?

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 27 December 2025 at 07:52 IST