अपडेटेड 2 March 2026 at 13:43 IST

'शराब-मांस-जुए की यहां कोई जगह नहीं... ब्रज की होली प्रेम और संस्कारों की है', मथुरा में होली को लेकर देवकीनंदन ठाकुर की चेतावनी

मथुरा की होली को लेकर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा है कि देश-विदेश से लोग यहां भगवान के रंग में रंगने आए हैं, ब्रज की होली प्रेम, रंग और संस्कारों की है। यहां शराब, मांस, द्वेष और जुए की कोई जगह नहीं है।

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देवकीनंदन ठाकुर | Image: @DN_Thakur_Ji

Devkinandan Thakur in Mathura: ब्रज में होली का उत्सव अनोखा और आध्यात्मिक है। यहां होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी परंपराओं का महोत्सव भी है। आध्यात्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने मथुरा में कहा कि 'देश-विदेश से लोग भगवान के रंग में रंगने आए हैं।

आध्यात्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने आगे कहा कि,  'ब्रज की होली प्रेम, रंग और संस्कारों की है। इसमें शराब, मांस, द्वेष और जुए की कोई जगह नहीं। जो ऐसा करते हैं, वे सनातन परंपराओं का पालन नहीं करते।' उन्होंने बताया कि इस साल चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, इसलिए होली का उत्सव विशेष सावधानी के साथ मनाया जा रहा है। सूतक काल में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को घर में रहकर भगवान का जाप करना चाहिए।

देवकीनंदन ठाकुर की नशेड़ियों को चेतावनी

प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर बार-बार नशे की लत के खिलाफ आवाज उठाते हैं। उनके प्रवचनों में भी नशेड़ियों को साफ चेतावनी मिलती है कि नशा (शराब, ड्रग्स) जीवन को बर्बाद कर देता है और युवा पीढ़ी को इससे बचना चाहिए।  

ब्रज में कहां-कहां मनाई जाती है होली?

  • मथुरा
  • वृंदावन
  • बरसाना
  • नंदगांव
  • गोकुल
  • महावन
  • बलदेव

ब्रज होली की प्रमुख परंपराएं

फूलों की होली: वृंदावन के मंदिरों में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं। यह दृश्य बेहद मनमोहक और आध्यात्मिक होता है।
लठमार होली: बरसाना और नंदगांव में महिलाएं हंसी-मजाक में पुरुषों को लाठियों से मारती हैं, पुरुष ढाल से बचते हैं। गोकुल-महावन में छड़ी मार होली और हुरंगा प्रसिद्ध है।
होलिका दहन और धुलेंडी: रात के वक्त होलिका दहन किया जाता है, चंद्र ग्रहण के कारण विशेष सावधानी बरती जाएगी। 4 मार्च को रंगवाली होली यानी धुलेंडी खेली जाएगी।

ब्रज में होली बसंत पंचमी से शुरू होकर 40 दिनों तक चलती है। जहां देशभर में 4 मार्च को होली मनाई जाएगी, वहीं ब्रज में उत्सव मार्च के दूसरे सप्ताह तक जारी रहेगा। यह उत्सव भक्ति, संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है।

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Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 2 March 2026 at 13:43 IST