UP में गोशालाओं में होंगे मांगलिक कार्यक्रम, योगी सरकार परंपरा और स्थानीय संस्कृति को देगी मंच

उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में गांव की गोशालाएं भी स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान बनेंगी। योगी सरकार का यह विजन जल्द ही मूर्त रूप लेने वाला है। गो-पर्यटन से जोड़कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।

 
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gaushala manglik karyakram cm yogi | Image: Gemini, X

उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में गांव की गोशालाएं भी स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान बनेंगी। योगी सरकार का यह विजन जल्द ही मूर्त रूप लेने वाला है। गो-संरक्षण के लिए संचालित गोशालाओं को अब परंपरा, भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी है। चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को गो-पर्यटन से जोड़कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोशालाओं के इस प्रस्तावित नए स्वरूप में संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को भी स्थान मिलेगा। इसका उद्देश्य किसी क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को वहां की गोशाला से जोड़ना है। इससे गोशाला केवल पशु संरक्षण का स्थान न रहकर ग्रामीण जीवन और स्थानीय पहचान से परिचित कराने वाला केंद्र बन सकती है। क्षेत्र के अनुरूप यहां ऐसी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं, जो बाहर से आने वाले लोगों को गांव की जीवनशैली, पशुपालन और स्थानीय परंपराओं से जोड़ें।

मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी खुलेंगे द्वार

योगी सरकार ने चयनित गोशालाओं में मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी व्यवस्था विकसित किए जाने की तैयारी की है। इससे गोशालाओं का उपयोग केवल दैनिक गो-संरक्षण गतिविधियों तक सीमित न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भी जुड़ सकेगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसे स्थलों को विकसित करने की योजना है, जहां ग्रामीण परिवेश के बीच पारंपरिक कार्यक्रमों के आयोजन की सुविधा उपलब्ध हो सके। 

इससे गोशालाओं के आसपास आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अवसर बनेंगे। गो-पर्यटन का यह मॉडल हर जगह एक जैसा नहीं होगा। जिस क्षेत्र की जो विशेषता होगी, उसी के अनुरूप गोशाला का स्वरूप विकसित करने पर जोर रहेगा। कहीं लोक संस्कृति और परंपराएं आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं तो कहीं स्थानीय खान-पान, कला, शिल्प या ग्रामीण जीवनशैली को गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी अपनी विशेषताओं के आधार पर गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल आकार ले सकते हैं।

स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे अवसर

श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गो-पर्यटन विकसित होने पर इसका दायरा केवल गोशाला परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, छोटे कारोबारियों और खान-पान से जुड़े लोगों के लिए भी इससे नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बनने की संभावना है। 

हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक स्वरूप संबंधित गोशाला और वहां विकसित की जाने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा। इस मॉडल में गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गोशाला से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। गोशाला के आसपास स्थानीय उत्पादों, ग्रामीण कला और पारंपरिक गतिविधियों को स्थान मिलने से गांव की विशिष्ट पहचान को सामने लाने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित गतिविधियों का एक नया आधार तैयार हो सकता है।

कान्हा हाउस और बड़े केंद्र भी होंगे विकसित

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो-संरक्षण केंद्रों को नया स्वरूप देने की रणनीति बनाई गई है। चयनित गोशालाओं के साथ कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को भी विकसित करने की तैयारी है। पूरी पहल का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि गोशालाओं को गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे संरक्षण की मूल भूमिका बरकरार रखते हुए उनके उपयोग का दायरा बढ़ सकता है। गांव आने वाला व्यक्ति केवल गोशाला देखने तक सीमित न रहे, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन को भी अनुभव कर सके, इसी सोच के अनुरूप मॉडल विकसित किए जाने की तैयारी है।

गांव की पहचान बनेगी अपनी गोशाला

ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन का आकर्षण अक्सर वहां की स्थानीय पहचान में छिपा होता है। हर गांव और क्षेत्र की अपनी कहानी, परंपरा और जीवनशैली होती है। यदि इन्हें व्यवस्थित ढंग से गोशालाओं से जोड़ा जाता है तो ये केंद्र ग्रामीण पर्यटन के नए पड़ाव बन सकते हैं। 

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Published By : Kritarth Sardana

पब्लिश्ड 21 September 2026 at 23:57 IST