अपडेटेड 3 March 2025 at 22:57 IST
संभल जामा मस्जिद रंगाई-पुताई पर सुनवाई से पहले हिंदू पक्ष का हलफनामा, एग्रीमेंट की प्रमाणिकता पर उठाए सवाल
संभल की शाही जामा मस्जिद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में कल होने वाली सुनवाई से पहले हिंदू पक्ष ने एक हलफनामा दाखिल किया है।
अखिलेश राय
संभल की शाही जामा मस्जिद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में कल होने वाली सुनवाई से पहले हिंदू पक्ष ने एक हलफनामा दाखिल किया है। हिन्दू पक्ष ने अपने हलफनामे में 3 जनवरी 1927 को मस्जिद कमेटी और भारत सरकार के बीच कथित एग्रीमेंट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया। हलफनामें में कहा गया है कि जिस एग्रीमेंट के आधार पर मुस्लिम पक्ष रंगी पुताई की मांग कर रहा है वह भरोसे के काबिल नहीं है।
हिंदू पक्ष की ओर दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि The Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 के लागू होने के बाद से Ancient Monument Preservation Act 1904 के तहत किसी भी सरकार और प्राइवेट पार्टी के बीच हुआ कोई भी समझौता निष्क्रिय और निष्प्रभावी हो गया है। ऐसे में मस्जिद कमेटी 1927 के एग्रीमेंट का हवाला नहीं दे सकती है।
कमेटी की याचिका खारिज कर देना चाहिए- हिंदू पक्ष का हलफनामा
राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों पर The Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Rules 1959 का सेक्शन 3 लागू नहीं होता है। जिस परिसर में ASI ही रंगाई पुताई कर सकती है वहां कमेटी ने गैरकानूनी तरीके से कई बदलाव किए। ऐसे में कमेटी की याचिका खारिज कर देना चाहिए।
हिंदू पक्ष के लिए ये जगह धार्मिक महत्व रखती- हिंदू पक्ष का हलफनामा
हिन्दू पक्ष की तरफ से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि ASI के नियंत्रण वाला स्मारक होने के बावजूद मस्जिद कमेटी इस मस्जिद को निजी संपति की तरह इस्तेमाल करती आई है। हिंदू पक्ष के लिए ये जगह धार्मिक महत्व रखती है। इसका असल नाम हरि हर मंदिर है। इस बात को साबित करने के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक पुस्तकों में पर्याप्त सबुत मौजूद है। मस्जिद कमेटी की इस बात की इजाजत नहीं होनी चाहिए कि वो इस जगह के स्वरूप में बदलाव करें अन्यथा इससे उनका केस कमजोर होगा।
Published By : Deepak Gupta
पब्लिश्ड 3 March 2025 at 22:57 IST