भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी भारत की चुनावी व्यवस्था को सराहा, ट्रंप के 'सेव अमेरिका एक्ट' के फैसले पर जताई सहमति
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहने करते हुए ट्रंप के 'सेव अमेरिका एक्ट' के फैसले पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करना चाहिए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी भारतीय चुनावी व्यवस्था की जमकर सराहना की है। उन्होंने ट्रंप के रुख से सहमति जताते हुए कहा कि अमेरिकी कांग्रेस को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करना चाहिए। राजदूत गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए भारतीय चुनाव प्रक्रिया की प्रशंसा की।
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली और वोटर ID सिस्टम का हवाला देते हुए 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) अमेरिका एक्ट' को पास करने की मांग दोहराई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उनके इस फैसले को सही बताते हुए अपना समर्थन दिया है। उन्होंने अपने X पोस्ट में भारत की चुनावी व्यवस्था को सराहा है।
सर्जियो गोर ने भारत की चुनाव प्रक्रिया पर क्या कहा?
सर्जियो गोर ने X पर लिखा है, भारत की चुनाव प्रणाली का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप बिल्कुल सही हैं। भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ (646 मिलियन) मतदाताओं में से प्रत्येक के लिए फोटो पहचान पत्र अनिवार्य था। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करना चाहिए।
भारत के इलेक्शन सिस्टम के मुरीद हुए ट्रंप
बता दें कि ट्रंप ने अमेरिका में चुनाव नियमों में सख्ती की जरूरत पर जोर देते हुए भारत के चुनावी सिस्टम को सराहा है। ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया, "इस महीने की शुरुआत में, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछ, अमेरिका में बिना वैध फोटो आईडी के चुनाव कैसे हो सकते हैं? भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ (646 मिलियन) मतदाता थे! 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट दिया, और हर मतदाता के पास वैध फोटो पहचान पत्र होना जरूरी था। हमें अभी 'सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की जरूरत है!"
'सेव अमेरिका एक्ट’ पर बहस
हालांकि इस मुद्दे पर अमेरिका में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच मतभेद बना हुआ है। इसी महीने अमेरिकी सीनेट पांच हफ्ते की छुट्टी पर चली गई थी और इस दौरान इस कानून को पास कराने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। अब इसे लेकर एक बार फिर से हलचल बढ़ गई है।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 18 August 2026 at 09:21 IST