उत्तराखंड में एक ही दिन में दो बार कांपी धरती, उत्तरकाशी में 4.2 और बागेश्वर में 2.8 तीव्रता के भूकंप झटके

उत्तराखंड में शनिवार को फिर धरती कांप उठी, जहां एक ही दिन में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रात लगभग 8:08 बजे उत्तरकाशी जिले में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया, जबकि इससे पहले बागेश्वर जिले में 2.8 तीव्रता का हल्का झटका दर्ज किया गया था। लगातार आ रहे इन झटकों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

 
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उत्तराखंड में एक ही दिन में दो बार कांपी धरती, उत्तरकाशी में 4.2 और बागेश्वर में 2.8 तीव्रता के भूकंप झटके | Image: ANI

उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से भूकंप के झटके लगातार महसूस किए जा रहे हैं। हाल ही में राज्य में एक ही दिन में दो बार धरती कांप उठी, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया है। लगातार आ रहे इन भूकंपों ने स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। आइए जानते हैं इस सिलसिलेवार गतिविधि और इसके वैज्ञानिक कारणों के बारे में।

एक दिन में दो बार कांपी उत्तराखंड की धरती

उत्तराखंड में आज दो अलग-अलग जिलों में भूकंप के झटके दर्ज किए गए। रात 8:08 बजे उत्तरकाशी जिले में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। इसकी गहराई और झटकों के तेज होने के कारण लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले आज ही के दिन बागेश्वर में भी 2.8 तीव्रता का हल्का भूकंप आया था। हालांकि इन झटकों से किसी बड़े नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। आपको बता दें, इससे पहले 6 अक्टूबर को चमोली जिले में 4.9 तीव्रता का एक और मजबूत भूकंप आया था, जिसके झटके दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए थे।

चमोली भूकंप और दिल्ली तक महसूस हुए झटके

6 अक्टूबर को आए 4.9 तीव्रता वाले भूकंप का केंद्र चमोली में जमीन से 13 किलोमीटर की गहराई पर था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) दोनों ने इसकी पुष्टि की थी। इस भूकंप का दायरा काफी बड़ा था। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित कई हिस्सों में धरती हिलने के बाद लोग डरकर घरों से बाहर आ गए थे। यहां तक कि दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों में भी लोगों ने इस झटके को महसूस किया था, जिससे उत्तर भारत में हड़कंप मच गया था।

उत्तराखंड में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड का गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र भारत के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में आता है। यहां भूकंप आने के पीछे मुख्य कारण हैं। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार घर्षण और टक्कर होती रहती है, जिससे जमीन के भीतर अत्यधिक ऊर्जा और दबाव बनता है। इस क्षेत्र में 'मेन सेंट्रल थ्रस्ट' जैसी संवेदनशील भूगर्भीय सीमाएं हैं, जो लघु और उच्च हिमालय को अलग करती हैं। अतीत के बड़े भूकंप भी इसी फॉल्ट लाइन के आसपास केंद्रित रहे हैं।

क्या बड़े खतरे का है संकेत?

इतिहास गवाह है कि उत्तराखंड ने 1991 का उत्तरकाशी और 1999 का चमोली भूकंप जैसी आपदाएं झेली हैं। हालांकि, हालिया 4.9 तीव्रता के भूकंप को मध्यम श्रेणी में रखा गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल झटके महसूस होने से यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि कोई बहुत बड़ा भूकंप आने वाला है। सटीक आकलन के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अंतिम और विस्तृत आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर नागरिकों को हमेशा आपदा प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए।

October 10, 2026

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 10 October 2026 at 22:47 IST