भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया इसलिए हत्या हुई, मुझे भी टारगेट किया जा रहा है', चंद्रनाथ की हत्या पर शुभेंदु अधिकारी ने लगाया बड़ा आरोप
पुश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि उनके निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या एक 'सोची-समझी साजिश' का नतीजा है।
पुश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि उनके निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या एक 'सोची-समझी साजिश' का नतीजा है। उन्होंने दावा किया कि चंद्रनाथ को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह हमसे जुड़े थे और हमने भबानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव में हराया है।
जब रथ का पार्थिव शरीर अस्पताल से मध्यमग्राम स्थित उनके आवास पर लाया जा रहा था, तब पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने कहा, "जिस तरह से यह हत्या की गई है, उसकी हम जितनी भी निंदा करें, वह कम है। उसे इसलिए मारा गया क्योंकि वह मेरा सहयोगी था, और मैंने भबानीपुर में ममता बनर्जी को हराया था। उसकी हत्या का कारण यही हो सकता है।"
उन्होंने हत्या के तरीके बारे में बात करते कहा कि पिन प्वाइंट करके गोली मारी गई है। पूरी प्लानिंग करके स्पेशलिस्ट खूनी आतंकवादी ने इस वारदात को अंजाम दिया है। डीजीपी साहब को हत्या को लेकर बहुत सारे क्लू मिल गए हैं। हत्या में प्रयोग हुई मोटरसाइिकल भी बरामद हो गई है। भरोसा जताया कि पुलिस उनके कार्यकारी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला सुलझा लेगी। जांचकर्ता सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने हत्या को बताया टारगेट किलिंग
पीए की हत्या को एक टारगेट किलिंग बताते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया वारदात को बड़ी ही बारीकी से अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा, "यह एक सुनियोजित ऑपरेशन था। कई दिनों तक रेकी की गई थी और पीड़ित को करीब से गोली मारने से पहले उसका पीछा किया गया था।" उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पोस्टमार्टम से संकेत मिलता है कि उसे बहुत करीब से कई गोलियां मारी गई थीं ताकि उसकी तत्काल मौत सुनिश्चित की जा सके।
सुपारी कीलर ने मारी गोली
शुभेंदु का दावा है कि हत्या की योजना निर्मम तरीके से बनाई गई थी और इसके लिए एक सुपारी कीलर को किराए पर लिया गया था। उन्होंने कहा-विपक्षी नेता के सरकारी कार्यकारी सहायक को गोली मार दी गई। उन्होंने वायुसेना में 10 साल सेवा की थी। अब मुझे लगता है कि सदन के लोग सोच रहे होंगे कि अगर मैंने मदद न की होती, अगर भवानीपुर में मुख्यमंत्री पद से मेरी हार न हुई होती, तो 38 वर्षीय युवक को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़ती। उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि वह शुभेंदु अधिकारी का करीबी सहयोगी थे।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 7 May 2026 at 17:06 IST