सोनम रघुवंशी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से किया इनकार, मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी
Honeymoon Murder Case: राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। सोनम को सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उसकी जमानत पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया।
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Raja Raghuvanshi Murder Case: मेघालय के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सोनम की जमानत रद्द करने से कर दिया है। मेघालय सरकार की याचिका पर कोर्ट ने सोनम के वकील को जवाबी हफलनामा दाखिल करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई अगले गुरुवार (9 जुलाई) को होगी।
कोर्ट ने सोनम की राहत को रखा बरकरार
मेघालय सरकार की ओर से हाई कोर्ट के सोनम को जमानत देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले को लेकर जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने आज (3 जुलाई) को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि शुरुआती तौर पर वे जमानत पर रोक लगाने के पक्ष में थे, क्योंकि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें सोनम को गिरफ्तारी के कारण न बताए गए हों।
कोर्ट ने आगे कहा कि सोनम पहले ही जमानत पर बाहर हैं, इसलिए वे आदेश को पलटने के पक्ष में नहीं हैं। मामला ट्रायल के दौरान तय किया जाना है। अदालत ने कहा कि उन्हें (सोनम) काउंटर हलफनामा (जवाब) दाखिल करने दें।
सरकार ने किया जमानत का विरोध
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसे यह ध्यान में रखना होगा कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद”। कोर्ट ने आगे कहा कि हाई कोर्ट जिस तरह से इस मामले को देख रहा है, उसे लेकर हमें कुछ आपत्तियां हैं।
कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के फैसले को बेहद चौंकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह पहले से तय किया गया मर्डर था। पत्नी अपने पति को पहाड़ी इलाके में ले जाती है... हमले में शामिल होती है, उसकी हत्या कर दी जाती है और फिर लाश को खाई में फेंक दिया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हत्या के बाद सोनम फरार हो गई थीं। बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में 94 गवाह हैं।
टाइपिंग की गलती बनी जमानत का आधार
उन्होंने आगे कहा कि हाई कोर्ट ने सोनम को सिर्फ इसी आधार पर जमानत दे दी कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के बजाय गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी। उनके अनुसार, भारतीय न्याय संहिता में धारा 403 नाम की कोई धारा है ही नहीं, यह मात्र टाइपिंग की चूक थी। मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी के वक्त आरोपी को हत्या का आरोप और गिरफ्तारी के कारण साफ-साफ बता दिए थे। इसलिए केवल एक तकनीकी भूल के आधार पर जमानत देना उचित नहीं है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 3 July 2026 at 11:52 IST