अपडेटेड 4 February 2026 at 14:58 IST

'चुनाव से पहले बंगाल को टारगेट किया, SIR का मकसद लिस्ट से नाम हटाना', SC में बोलीं CM ममता, कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस

West Bengal SIR Hearing: पश्चिम बंगाल में SIR पर सुनवाई के दौरान CM ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें रखीं। उन्होंने कोर्ट में खुद को 'बंधुआ मजदूर' बताते हुए जोर देकर कहा कि वह अपनी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े मकसद के लिए लड़ रही हैं।

Follow :  
×

Share


West Bengal SIR Hearing | Image: ANI

Mamata Banerjee vs EC: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज (4 फरवरी) को अहम सुनवाई हुई। सीएम ममता ने कोर्ट से खुद अपनी बात रखने की इजाजत मांगी। उन्होंने कोर्ट में कहा कि जब न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा होता है, तो ऐसा लगता है कि कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा है।

अपनी पार्टी नहीं, बड़े मकसद के लिए लड़ रही हूं- CM ममता 

CM ममता ने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी गई थीं। खुद को 'बंधुआ मजदूर' बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अपनी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े मकसद के लिए लड़ रही हैं। इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि SIR का मकसद वोट हटाना है। उन्होंने कहा कि वो ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख अखबारों में छपी तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल सिर्फ नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, CM ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो यह सवाल उठाया जाता है कि वह अपने पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है? उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से लिस्ट से हटा दिए गए हैं।

सीएम ममता ने कोर्ट में कहा कि जो गरीब लोग फ्लैट खरीदते हैं या अपना घर बदलते हैं, उनके नाम भी हटाए जा रहे हैं। बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन सबके बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को 'गलत मैपिंग' कहते हैं, जो कोर्ट के पिछले निर्देशों का उल्लंघन है।

'सिर्फ बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है'

CM ममता बनर्जी ने कोर्ट को आगे बताया कि इस कोर्ट के निर्देश देने के बाद कि आधार को एक डॉक्यूमेंट के तौर पर स्वीकार किया जाए, बंगाल के लोगों को राहत मिली है। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों में डोमिसाइल और जाति प्रमाण पत्र जैसे डॉक्यूमेंट स्वीकार किए जाते हैं, जबकि चुनाव से ठीक पहले सिर्फ बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा था।

मुख्यमंत्री ने कोर्ट में कहा कि 4 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, 3 महीने में यह सब करने की जल्दी क्या थी? जब फसल कटाई का मौसम चल रहा है। लोग यात्रा कर रहे हैं। बीएलओ की मौत हो गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। यह असम में क्यों नहीं हो रहा है?

CJI ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि एक प्रैक्टिकल समाधान निकाला जा सकता है और निर्देश दिया कि सोमवार तक राज्य उन ग्रुप B अधिकारियों की लिस्ट दें जिन्हें फ्री किया जा सकता है और उपलब्ध कराया जा सकता है।

चीफ जस्टिस ने निर्देश दिया कि दोनों याचिकाओं में नोटिस जारी किया जाए। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक और याचिका है जिसमें भारत के चुनाव आयोग ने पहले ही एक हलफनामा दायर किया है, और उसमें उठाए गए मुद्दों का इस मामले पर असर पड़ेगा। चीफ जस्टिस ने निर्देश दिया कि उस मामले को भी सोमवार को लिया जाए और कहा कि कोर्ट उस दिन सभी जुड़े हुए मुद्दों पर सुनवाई करेगा।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोर्ट से लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और बेंच का आभार व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें: 'देखो, एक गद्दार...', राहुल गांधी ने की टिप्पणी, तो केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने दिया ये जवाब, संसद के गेट पर तीखी बहस

Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 4 February 2026 at 14:58 IST