अपडेटेड 21 January 2026 at 23:42 IST
अरावली में अवैध खनन पर SC ने जताई चिंता, विशेषज्ञों की कमेटी करेगी जांच, 100 मीटर नियम पर रोक बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अवैध खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में अवैध खनन से ऐसी क्षति होती है जिसकी भरपाई भविष्य में संभव नहीं है।
Supreme Court Aravalli: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विवाद मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान अवैध खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में अवैध खनन से ऐसी क्षति होती है जिसकी भरपाई भविष्य में संभव नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल कानूनी विवाद नहीं, बल्कि देश के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अधिकरों से जुड़ा गंभीर मामला है।
विशेषज्ञ समिति करेगी समग्र जांच
कोर्ट ने अरावली के पर्यावरणीय महत्व और खनन से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला लिया है। इस समिति में पर्यावरण, वन संरक्षण, भू-विज्ञान और संबंधित क्षेत्रों के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे। अदालत ने केंद्र सरकार और न्याय मित्र से चार सप्ताह के भीतर उपयुक्त विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा है, ताकि समिति सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम कर सके और एक वैज्ञानिक, निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर सके।
100 मीटर नियम पर रोक जारी
कोर्ट ने अपने उस पुराने फैसले पर लगी रोक को बढ़ा दिया है, जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की सिफारिश थी। पर्यावरण मंत्रालय की समिति की इस सिफारिश को अदालत पहले ही पुनर्विचार योग्य बताते हुए स्थगित कर चुकी है। अदालत का मानना है कि यह मुद्दा संवेदनशील है और इसे जल्दबाजी में तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि अरावली का महत्व उसके भूगोल, जैव विविधता और जल संरक्षण से जुड़ा हुआ है। इसलिए, नई विशेषज्ञ समिति तथ्यात्मक और वैज्ञानिक आधार पर अरावली की नई परिभाषा की सिफारिश देगी।
राजस्थान में अवैध खनन पर सरकार से जवाब तलब
सुनवाई के दौरान राजस्थान के कई इलाकों में चल रहे अवैध खनन का मुद्दा भी उठा, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त लहजे में जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि अरावली जैसे क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों का उल्लंघन है। राजस्थान सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया।
'और कितना सुखाओगे सुकना लेक?'
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की सुकना लेक की स्थिति का हवाला देते हुए सीधे तौर पर माफिया और प्रशासनिक तंत्र के गठजोड़ पर सवाल उठाए। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है और कोर्ट ने सीधे तौर पर प्रशासन से पूछा कि और कितना सुखाओगे सुकना लेक?
20 नवंबर के आदेश के बाद उठा था विवाद
बता दें, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर के आदेश के बाद काफी विवाद उठा था, जिसमें कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखलाओं की समान परिभाषा स्वीकार करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति की सिफारिश मंजूर की थी। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू की और 29 दिसंबर को अपने 20 नवंबर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 21 January 2026 at 23:42 IST