Super El Nino 2026: भारत में 'सुपर एल नीनो' से अब और भयंकर गर्मी पड़ेगी, कमजोर होगा मानसून और सूखे का भी अलर्ट; जानें देश पर इसका क्या असर पड़ेगा

सुपर एल नीनो के असर से भारत में तेज गर्मी और कमजोर मानसून की आशंका जताई जा रही है। IMD ने उत्तरी राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया। जानिए ताजा अपडेट, पढ़ें पूरी खबर।

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Super El Nino 2026: भारत में रिकॉर्ड गर्मी और सूखे की भयंकर आशंका | Image: Representative

Super El Nino 2026: देश के कई हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान,  बिहार और  मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तो 48 डिग्री तक पारा दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले 5 दिनों के लिए कुछ इलाकों में हीटवेव से लेकर गंभीर हीटवेव का अलर्ट जारी रखा है। 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इक्वेटोरियल प्रशांत महासागर में 'सुपर एल नीनो' (Super El Nino) की स्थिति बन रही है। यह सामान्य एल नीनो से ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसे सुपर एल नीनो (Super El Nino) कहते हैं। 2015 में ऐसा ही हुआ था, जिससे कई देशों में सूखा और पानी की कमी देखी गई। 

सुपर एल नीनो का भारत पर कितना असर?

एल नीनो भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर सकता है। IMD ने 2026 के मानसून को सामान्य से कम (लगभग 92%) रहने का अनुमान लगाया है। इससे खेती, पानी की सप्लाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है। उत्तरी और मध्य भारत में सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ तटीय इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है। 

1877 की याद दिलाता है ये खतरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना 1877 के बाद सबसे खतरनाक हो सकती है। उस वक्त दुनिया की करीब 4% आबादी प्रभावित हुई थी। 2015 के सुपर एल नीनो में भी इथियोपिया में सूखा, प्यूर्टो रिको में पानी का संकट और तूफान आए थे।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि दोपहर में बाहर कम निकलें, खूब पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। किसानों को भी पानी का सही इस्तेमाल करने और सूखा सहन करने वाली फसलों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। बतादें मई के लास्ट में और जुलाई में एल नीनो बनने की 82% संभावना है, जो सर्दियों तक रह सकता है। भारत जैसे कृषि पर निर्भर देश में इसकी निगरानी बहुत जरूरी है। सरकार और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।  

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Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 22 May 2026 at 08:07 IST