'पूरे देश की सड़कों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते', SC ने डॉग लवर्स को दिया झटका; आदेश में संशोधन से किया इनकार
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर डॉग लवर्स झटका लगा है। कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया।
आवारा कुत्तों को लेकर दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया। एनिमल वेल फेयर के आवेदन को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल का पालन नहीं हो रहा है, ऐसे में कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े करना गलत है।
कोर्ट ने कई सारे NGO और डॉग लवर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हमने अपने फैसले को तीन हिस्सों में बांटा है। हमने 7 नवंबर के फेसले को वापस लेने की मांग करने वाली अर्जियों पर विस्तार से विचार किया है, इसके बाद सभी अर्जियों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हमारे आदेश का पालन कर रहे नगर निकायों, राज्यों आदि के वे कर्मचारी और अधिकारियों जो इस काम में लगे हैं और उन्हें काम करने दिया जाए और उन्हें उचित संरक्षण मिले।
पूरे देश की सड़कों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते-SC
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों आदि जैसे सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने नवंबर 2025 के आदेश में संशोधन करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले से डॉग लवर्स को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने डॉग लवर्स और NGO की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अदालत इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि ABC फ्रेमवर्क 2001 में पेश किया गया था। आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और उसे मापने के प्रयासों में साफ तौर पर कमी दिखी है। ये प्रयास छिटपुट रहे हैं और इनमें संस्थागत गहराई की कमी रही है।
नसबंदी-टीकाकरण अभियान सही ढंग से नहीं चलाए गए-SC
SC ने आगे कहा, नसबंदी और टीकाकरण अभियान बिना किसी योजना के चलाए गए हैं। यह फ्रेमवर्क के उद्देश्यों को ही विफल कर देता है। यदि राज्यों ने उचित दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो मौजूदा स्थिति इतनी चिंताजनक नहीं होती। आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि यह समस्या अब बेहद चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है।
कुत्तों के काटने की संख्या चिंताजनक
अकेले राजस्थान के श्री गंगानगर शहर में ही एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने के 1084 मामले सामने आए। रिपोर्टों के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें उनके चेहरों पर गहरे घाव होना भी शामिल है। तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में ही लगभग 2 लाख मामले दर्ज किए गए। हमें उन रिपोर्टों की जानकारी है जिनसे पता चलता है कि हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों, शहरी केंद्रों आदि में कुत्तों के काटने की घटनाएं हो रही हैं।
देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों (IGI) में कुत्तों के काटने की बार-बार होने वाली घटनाएं गंभीर कमियों को दर्शाती हैं। सूरत में एक जर्मन यात्री को कुत्ते ने काट लिया था। ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन पर जनता के भरोसे पर बुरा असर डालती हैं। यह नुकसान केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अकल्पनीय है। 22 अगस्त और 7 नवंबर को जारी निर्देशों के बावजूद, रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि ये निर्देश जमीनी स्तर तक पहुंच पाए हैं।
हम जमीनी हकीकतों से आंखें नहीं फेर सकती-SC
इस अदालत के निर्देशों का पालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा। निर्देशों का पालन न करने पर राज्यों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही, अनुशासनात्मक कार्यवाही और टॉर्ट दायित्व (tortious liability) की कार्यवाही शुरू की जाएगी। राज्य के दायित्वों के लिए एक रूपरेखा तैयार करना जरूरी है। राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता। अदालत जमीनी हकीकतों से आंखें नहीं फेर सकती।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 19 May 2026 at 11:04 IST