‘मिर्जापुर द मूवी’ में ‘शूरवीर’ गीत पर बवाल! महाराणा प्रताप के शौर्य को गैंगस्टरों से जोड़ने का आरोप, करणी सेना का 24 घंटे का अल्टीमेटम

विवाद के बीच राष्ट्रीय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने भी मोर्चा खोल दिया है, मकराना ने कहा कि CBFC और सरकार को 24 घंटे का समय दिया गया है, इसके बाद करणी सेना आगे की रणनीति तय करेगी। मकराना ने कहा कि फिल्म में किरदारों को लेकर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस तरह ‘शूरवीर’ गीत का इस्तेमाल किया गया, वह गलत है, उनके मुताबिक फिल्म में माफिया किरदारों को महाराणा प्रताप से जोड़ने जैसा प्रतीत होता है।

 
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‘मिर्जापुर द मूवी’ में ‘शूरवीर’ गीत पर बवाल | Image: Mirzapur The Movie

राहुल जांगिड़ की रिपोर्ट

‘मिर्जापुर द मूवी’ रिलीज के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है। फिल्म में महाराणा प्रताप के शौर्य, स्वाभिमान और त्याग को समर्पित ‘शूरवीर’ गीत के इस्तेमाल को लेकर सियासी और सामाजिक विरोध तेज हो गया है। आरोप है कि इस गीत को फिल्म में गैंगस्टर और आपराधिक किरदारों वाले दृश्यों के साथ इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद महाराणा प्रताप के सम्मान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

फिल्म में गीत के इस्तेमाल पर राजस्थान के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। राठौड़ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरमैन शशि शेखर वेम्पति को पत्र लिखकर फिल्म से ‘शूरवीर’ गीत को तत्काल हटाने की मांग की है।

महाराणा प्रताप के गीत को गैंगस्टरों के सीन में क्यों लगाया?

राठौड़ ने अपने पत्र में कहा कि ‘शूरवीर’ गीत महाराणा प्रताप के शौर्य, स्वाभिमान और त्याग को समर्पित है। ऐसे गीत को आपराधिक और गैंगस्टर किरदारों वाले दृश्यों में इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने सवाल उठाया कि महाराणा प्रताप सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव और वीरता के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके शौर्य से जुड़े गीत की मूल भावना को अपराध और गैंग संस्कृति के साथ जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता।

राठौड़ ने CBFC से फिल्म से गीत हटाने के साथ-साथ भविष्य में ऐतिहासिक महापुरुषों से जुड़े प्रतीकों और भावनाओं के कथित गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।

श्री राष्ट्रीय करणी सेना ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

विवाद के बीच श्री राष्ट्रीय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने भी मोर्चा खोल दिया है, मकराना ने कहा कि CBFC और सरकार को 24 घंटे का समय दिया गया है, इसके बाद करणी सेना आगे की रणनीति तय करेगी। मकराना ने कहा कि फिल्म में किरदारों को लेकर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस तरह ‘शूरवीर’ गीत का इस्तेमाल किया गया, वह गलत है, उनके मुताबिक फिल्म में माफिया किरदारों को महाराणा प्रताप से जोड़ने जैसा प्रतीत होता है।

‘गुंडों की तुलना महाराणा प्रताप से करना गलत’

मकराना ने साफ कहा कि गुंडों और माफियाओं की तुलना महाराणा प्रताप से करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस देश में महाराणा प्रताप को प्रातः स्मरणीय माना जाता है, वहां गाली-गलौज और अपराध से जुड़े दृश्यों में महाराणा प्रताप के नाम से जुड़े गीत का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। मकराना ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह का इस्तेमाल उनके लिए भी ठीक नहीं रहेगा।

‘हर दिन इतिहास और महापुरुषों को कलंकित करने वाली फिल्में?’

मकराना ने फिल्म इंडस्ट्री पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार ऐसी फिल्में बनाई जा रही हैं जिनमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को विवादित संदर्भों में पेश किया जाता है। उन्होंने दिल्ली में स्वरा भास्कर द्वारा जौहर और त्याग-तपस्या को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयानों का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसी घटनाओं से लगातार विवाद खड़े किए जा रहे हैं।

‘ठाकुर को ही गुंडा क्यों दिखाया जाता है?’

मकराना ने फिल्मों और मनोरंजन उद्योग में जातीय चरित्र चित्रण को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया, उन्होंने दावा किया कि एक खास तरह का परसेप्शन लंबे समय से बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि फिल्मों में अगर किसी समुदाय को मिलावटखोर या घूसखोर दिखाना हो तो एक खास जाति को चुना जाता है, पाखंडी दिखाना हो तो ब्राह्मण और गुंडा या आतंकी दिखाना हो तो ठाकुर को दिखाया जाता है। मकराना ने इसे लगातार तैयार किया जा रहा ‘परसेप्शन’ बताते हुए फिल्म इंडस्ट्री और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।

कॉपीराइट विवाद ने भी पकड़ा तूल

‘शूरवीर’ गीत को लेकर कॉपीराइट का मुद्दा भी सामने आया है, मकराना ने दावा किया कि जिस कलाकार का यह गीत है, उसे कथित तौर पर फिल्म में गीत के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी और उससे अनुमति नहीं ली गई। ऐसे में अब विवाद सिर्फ महाराणा प्रताप के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित कॉपीराइट उल्लंघन का सवाल भी इससे जुड़ गया है।

‘फिल्म चलेगी या महाराणा प्रताप का सम्मान?’

मकराना ने कहा कि 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है और इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी, उन्होंने सवाल उठाया कि फिल्म महत्वपूर्ण है या महाराणा प्रताप का सम्मान? मकराना के बयान के मुताबिक, करणी सेना इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।

‘राजस्थान में कालीन भैया नहीं चलेंगे’

विवाद के बीच मकराना ने बेहद आक्रामक अंदाज में फिल्म के चर्चित किरदारों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान वीरों की भूमि है और यहां ‘गुड्डू भैया’ या ‘मुन्ना भैया’ जैसे किरदार नहीं चलेंगे उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर महाराणा प्रताप पर इस तरह की टिप्पणी या प्रस्तुति की गई तो इसका विरोध किया जाएगा

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या CBFC इस विवाद पर कोई कार्रवाई करेगा? क्या फिल्म से ‘शूरवीर’ गीत हटाया जाएगा? क्या निर्माता गीत के इस्तेमाल को लेकर सफाई देंगे? और सबसे बड़ा सवाल—क्या सिनेमाई आजादी के नाम पर ऐतिहासिक महापुरुषों के शौर्य और सम्मान को आपराधिक किरदारों के साथ जोड़ना स्वीकार किया जा सकता है?

‘मिर्जापुर द मूवी’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक गाने तक सीमित नहीं दिख रहा। आने वाले 24 घंटे में CBFC, सरकार और फिल्म निर्माताओं की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 10 September 2026 at 16:20 IST