अपडेटेड 28 March 2025 at 23:29 IST
भोजन बिल पर सेवा शुल्क स्वैच्छिक है, रेस्तरां इसे अनिवार्य नहीं बना सकते: उच्च न्यायालय
दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भोजन के बिल पर ग्राहकों द्वारा सेवा शुल्क का भुगतान किया जाना स्वैच्छिक है और इसे रेस्तरां अनिवार्य नहीं बना सकते।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि भोजन के बिल पर ग्राहकों द्वारा सेवा शुल्क का भुगतान किया जाना स्वैच्छिक है और इसे रेस्तरां अनिवार्य नहीं बना सकते।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने यह फैसला सुनाया और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के उन दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली रेस्तरां निकायों की दो याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें होटल एवं रेस्तरां पर भोजन बिल पर अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क वसूलने को लेकर रोक लगाई गई है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि भोजन के बिल पर सेवा शुल्क की अनिवार्य वसूली उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन और कानून के विपरीत है, लेकिन उपभोक्ताओं को स्वेच्छा से टिप देने से रोका नहीं गया है, यदि वे ऐसा करना चाहते हों तो।
उच्च न्यायालय ने कहा कि भोजन बिल पर अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क लेना ‘भ्रामक’ और ‘धोखाधड़ी’ है, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं को यह आभास होता है कि यह सेवा कर या जीएसटी के रूप में लगाया जा रहा है ।
न्यायमूर्ति सिंह ने इसे अनुचित व्यापार पद्धति करार दिया और कहा कि इसे अनिवार्य रूप से बिल में नहीं जोड़ा जा सकता।
‘फेडरेशन ऑफ होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई)’ और ‘नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई)’ ने 2022 में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर करके उच्च न्यायालय का रुख किया था।
अदालत ने दिशानिर्देशों को बरकरार रखा और याचिकाकर्ताओं पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे उपभोक्ता कल्याण के लिए सीसीपीए में जमा करना होगा।
Published By : Deepak Gupta
पब्लिश्ड 28 March 2025 at 23:29 IST