Mohan Bhagwat: 'दुनिया संकट में फंसती है तो हमारा देश शक्ति बनकर उभरता है और खतरे से बाहर निकालता है', युद्ध के बीच मोहन भागवत का बड़ा बयान
मोहन भागवत ने कहा, 'जब भी दुनिया किसी संकट में फंस जाती है, तो हमारा देश ही वह शक्ति बनकर उभरता है जो उसे उस खतरे से बाहर निकालता है।'
मिडिल ईस्ट में जारी संकट पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख पर बड़ी बात कहा है। नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, भारत के पास वैश्विक संकटों का सामना करने और दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है। मानवीय अस्तित्व का सच्चा दृष्टिकोण हमारी आध्यात्मिक ज्ञान-परंपरा में निहित है।
नागपुर के तुलसी नगर स्थित मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणदेश्वर प्रतिष्ठा महोत्सव को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, 'जब भी दुनिया किसी संकट में फंस जाती है, तो हमारा देश ही वह शक्ति बनकर उभरता है जो उसे उस खतरे से बाहर निकालता है। मानवीय अस्तित्व का सच्चा दृष्टिकोण हमारी इसी आध्यात्मिक ज्ञान-परंपरा में निहित है।'
दुनिया को संकट से भारत ने बाहर निकाला
मोहन भागवत ने आगे कहा, ‘जब बाहरी दुनिया से भौतिकवाद, संकीर्णतावाद और उपभोक्तावाद के तूफान आते हैं, ऐसे तूफान जो अक्सर दूसरे समाजों को तबाह कर देते हैं, तो वे लहरें बस हमें छूकर गुजर जाती हैं। हम अडिग, स्थिर और अपरिवर्तित खड़े रहते हैं। हमारी इस सहनशक्ति का कारण वही आध्यात्मिक ज्ञान है। यह हमारे संतों का हम पर एक ऋण है, जिसके लिए हम उनके आभारी हैं।’
मोहन भागवत ने संतों का जताया आभार
मोहन भागवत ने संतों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, यह हमारा कर्तव्य बन जाता है कि हम यहां अपनी श्रद्धा अर्पित करें और इन संतों की शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। यह आध्यात्मिकता का ऐसा ज्ञान है जो शेष विश्व और अन्य राष्ट्रों के लिए अज्ञात रहा, फिर भी हमारे पूर्वजों ने इसकी खोज की। हम सदैव उनके ऋणी रहेंगे।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 13 April 2026 at 14:00 IST