'भारत में रिजीम चेंज न कभी हुआ है और न होगा', RSS चीफ मोहन भागवत बोले- हिंदू के खिलाफ काम कर रहीं आसुरी ताकतें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ आसुरी ताकतें इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करती हैं और उनकी प्रकृति के कुछ लोग इसमें मदद करते हैं।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ आसुरी ताकतें इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करती हैं और उनकी प्रकृति के कुछ लोग इसमें मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि क्षुद्र सत्ता स्वार्थ और विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं। भागवत के मुताबिक, भारत सहित पूरी दुनिया में भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक और मानवीय संस्कारों को नष्ट करने की आसुरी प्रतिज्ञा के साथ पश्चिम से एक आंधी चली है, जिससे दुनिया के तथाकथित प्रगतिशील देश भी त्रस्त और असहाय हैं। रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सत्ता बदलना समस्या का समाधान नहीं है।
मोहन भागवत ने देश में हुए हाल के प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि रिजीम चेंज से कभी भी देश का भला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भारत में फ्रांस और बांग्लादेश जैसे प्रयास हुआ है, लेकिन यहां रिजीम चेंज नहीं हो सकता। मोहन भागवत ने मंगलवार (20 अक्टूबर) को नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में युवाओं का भी जिक्र किया। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एकता, AI से लेकर फ्रांस प्रोटेस्ट तक, सभी मुद्दों पर बात की। उन्होंने नशे की समस्या, सही-गलत के बीच अंतर समझने और नई पीढ़ी को संस्कार सिखाने पर भी जोर दिया। 'रिजीम चेंज न हुआ, न आगे होगा'
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है. पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।'
वंदे मातरम स्वाभिमान गाने में कोई संकोच या विरोध नहीं होना चाहिए
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, वंग भंग के विभाजनकारी षड्यंत्र को परास्त करने वाला वंदे मातरम् आज भी वह प्रेरणा देने के लिए सशक्त है एकता की। वो अपना राष्ट्रगीत है। और उसे स्वाभिमान से उच्च कंठ से और संपूर्ण गाने में कोई संकोच या विरोध होना नहीं चाहिए। भारत की मातृभूमि के नाते वह भक्ति है।
कैप्टन स्मित मच्छर ने प्राणों की बाजी लगाई
मोहन भागवन ने कहा, संगठित व बल संपन्न हिन्दू समाज की बात करना या उसके लिए कार्य करना सर्व पंथ समादर की भावना अथवा राष्ट्र की भावनिक एकात्मकता के विरुद्ध नहीं है; हिन्दू समाज का विचार व स्वभाव समावेशक होने के नाते संघ कार्य हम सबकी भावनिक एकात्मता, सद्भावना व सदाचार का पोषक ही होगा। पीढ़ी दर पीढ़ी मिलता रहा यह स्वभाव व संस्कार ही कैप्टन स्मित मच्छर को अपनी प्राणों की बाजी लगाकर मनुष्यों के संरक्षण के लिए स्वयं को झोंक देने की प्रेरणा देता है।
एआई के दौर में नैतिकता जरूरी
मोहन भागवत ने कहा तकनीक और एआई का उपयोग नैतिक अनुशासन के बिना हुआ, तो यह महाविनाश का कारण बन सकता है। भारत का प्राचीन सनातन विचार पूरे विश्व को परिवार मानता है और विकास का एक स्थायी, संतुलित व एकात्म मॉडल प्रस्तुत करता है। भारत की सनातन दृष्टि पूरी दुनिया को समन्वय, संयम और एकात्म विकास का एक नया प्रतिमान और मार्ग दे सकती है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 20 October 2026 at 12:29 IST