नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को हाई कोर्ट से झटका, आजीवन कारावास की सजा बरकरार, अदालत ने सरेंडर करने का दिया आदेश

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ की डिवींजन बेंच ने नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में आसाराम की अपील पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।

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Asaram Bapu | Image: File Photo

राजस्थान हाई कोर्ट से आसाराम बापू को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। साथ ही कोर्ट ने आसाराम को तुरंत सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें गैंगरेप के आरोप से बरी कर दिया, मगर अन्य गंभीर आरोपों में उनकी सजा यथावत रखी गई है। फिलहाल आसाराम मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत पर बाहर हैं।

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ की डिवींजन बेंच ने नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में आसाराम की अपील पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने 2018 में निचली अदालत द्वारा दिए गए दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया। हालांकि, खंडपीठ ने आसाराम को सामूहिक बलात्कार और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया है।

कोर्ट ने आसाराम को सरेंडर करने का दिया आदेश

हाई कोर्ट ने उन्हें तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अरुण कुमार मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने आसाराम बापू, शरतचंद्र और शिल्पी की अपीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन्हें IPC और POCSO एक्ट के तहत एक बच्चे के साथ गैंगरेप और गैंग पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, जबकि एक नाबालिग से रेप के लिए उनकी सजा बरकरार रखी, जिसमें अभी भी उम्रकैद है।

गैंगरेप के मामले में मिली राहत

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की एक डिवीजन बेंच ने आसाराम को IPC सेक्शन 376(D) और POCSO एक्ट के सेक्शन 5(G)/6 के तहत आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने उन्हें क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी से जुड़े IPC के सेक्शन 120(B) के तहत भी बरी कर दिया। हालांकि, बेंच ने नाबालिग से रेप से जुड़े IPC सेक्शन 376(2)(F) के तहत उनकी सजा बरकरार रखी, जिससे ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रहेगी।

जानें पूरा मामला

कोर्ट ने सह-आरोपी शरतचंद्र और शिल्पी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। निचली अदालत ने इन दोनों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी। बता दें कि यह मामला साल 2013 का है। आसाराम पर जोधपुर स्थित अपने आश्रम में ही एक नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था। पुलिस जांच के बाद आरोप पत्र दायर किया गया। अप्रैल 2018 में विशेष POCSO अदालत ने आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
 

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 27 May 2026 at 13:46 IST