अपडेटेड 16 January 2026 at 19:18 IST
R. Bharat Sangam: AI नए लेखकों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है? पीयूष पांडे, पंकज दुबे और श्वेता श्रीवास्तव ने दिया जवाब
‘रिपब्लिक भारत’ परिसर में आज शुक्रवार 16 जनवरी को 'संगम-साहित्य, सुर और शक्ति' का मंच सजा। इस दौरान पीयूष पांडेय AI को भविष्य के लिए संकट की तरह देख रहे हैं, वहीं पंकज दूबे इसे कल्पनाशीलता के एक नए टूल के रूप में देख रहे हैं।
R. Bharat Sangam 2026: ‘रिपब्लिक भारत’ परिसर में आज शुक्रवार 16 जनवरी को 'संगम-साहित्य, सुर और शक्ति' का मंच सजा। 'संगम' के इस मंच पर साहित्य, कला, संगीत, राजनीति, और मनोरंजन जगत के कई दिग्गज का जमावड़ा लगा।
इसी कड़ी में रिपब्लिक भारत के मंच पर ‘शब्दों के सिपाही’ कार्यक्रम में बायलिंगुअल बेस्टसेलिंग राइटर ‘पंकज दूबे’, कम शब्दों में गहरी बात कहने वाली लेखिका ‘श्वेता श्रीवास्तव’ और मनोज बाजपेयी की बायोग्राफी लिखने वाले स्टार राइटर ‘पीयूष पांडेय’ भी मौजूद रहे। उन्होंने इस दौरान AI को लेकर कहा कि किस तरह आर्टिफिशियल इंटरनेशनल ने नए लेखकों को प्रभावित किया है।
साहित्य और सृजन के भविष्य पर AI का साया
चर्चा के दौरान प्रसिद्ध लेखक और व्यंग्यकार पीयूष पांडेय ने AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। पीयूष पांडेय, जिन्होंने हाल ही में मनोज बाजपेयी की बायोग्राफी और अपना नया क्राइम फिक्शन उपन्यास ‘उसने बुलाया था’ पेश किया है, उनका मानना है कि इंटरनेट ने लेखन की दुनिया को पहले ही बदला था, लेकिन अब एआई लेखकों के सामने बिल्कुल नई और जटिल चुनौतियां पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य के भविष्य के लिए एआई का बढ़ता दखल एक चिंता का विषय है, क्योंकि आने वाले समय में टीवी और मीडिया इंडस्ट्री में भी चैटजीपीटी जैसे टूल्स का उपयोग बड़े पैमाने पर होने वाला है।
लेखन में कल्पनाशीलता का सबसे ज्यादा महत्व
मशहूर बायलिंगुअल बेस्टसेलिंग राइटर और पॉप कल्चर स्टोरीटेलर पंकज दूबे ने इस मुद्दे पर अपना नजरिया रखते हुए कहा कि एआई के आगमन ने लोगों की लिखने की शैली को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि, वे इस बात पर जोर देते हैं कि लेखन की मूल शक्ति मनुष्य की कल्पनाशीलता में निहित है।
पंकज दूबे कहते है कि किसी भी एआई टूल को सही निर्देश (प्रॉम्प्ट) देने के लिए भी एक मजबूत इमेजिनेशन या कल्पना की आवश्यकता होती है। उनके अनुसार, यह कल्पनाशीलता ही वह पंख है जिसके माध्यम से एक लेखक उड़ान भरता है, और बिना मानवीय सोच के तकनीक मात्र एक माध्यम बनकर रह जाती है।
साहित्य के लिए अध्ययन जरूरी
भारतीय जीवन की गहराई और मानवीय संवेदनाओं को अपने शब्दों में पिरोने वाली लेखिका श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि AI निगेटिव के साथ-साथ पॉजीटिव भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई हम पर निर्भर है, हम एआई पर नहीं।
श्वेता का मानना है कि एआई कभी भी मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं की जगह नहीं ले सकता, क्योंकि भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जिस गहराई की जरूरत होती है, वह तकनीक के पास नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर एआई द्वारा लिखवाना साहित्य नहीं है। उनके अनुसार, वास्तविक साहित्य रचने के लिए व्यापक अध्ययन और पठन-पाठन बहुत अनिवार्य है।
'संगम' को कामयाब बनाने में कई स्पॉन्सर आगे आए हैं, जिसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।
- Co-Presented by Jac Olivol
- Co-Powered By- Reliance Digital
- Co-Powered By - Realme 16 Pro Series
- Co-Powered By - Rajesh Masale
- Co-Powered By - Dabur Red
- Co-Powered By- Ravin Group
- In-Association With - Government of Uttar Pradesh
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- In-Association With - Karnataka Bank
- In-Association With- Shekhar Hospital, Lucknow
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 16 January 2026 at 19:18 IST