'BJP और चुनाव आयोग मिलकर पार्टी तोड़ते हैं...', राहुल गांधी के ट्वीट पर स्मृति ईरानी का पलटवार, कहा- उन्होंने कांग्रेस का काला इतिहास उजागर कर दिया

राहुल गांधी के आरोप पर पलटवार करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल ने भाजपा पर कटाक्ष कर अपनी ही पार्टी का काला इतिहास राष्ट्र के सामने प्रस्तुत कर दिया है।

 
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Smriti Irani & Rahul Gandhi | Image: X

चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी कर पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए हैं। इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा पर पार्टियों को तोड़ने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने तीखा पलटवार किया।

स्मृति ईरानी ने कहा, “आज राहुल गांधी ने भाजपा पर कटाक्ष कर अपनी ही पार्टी का काला इतिहास राष्ट्र के सामने प्रस्तुत कर दिया है। क्या ये सच नहीं कि साल 1980 में कांग्रेस की केंद्र की सरकार ने देश की 9 प्रादेशिक सरकारों को अनुच्छेद 356 का सहारा लेकर खारिज कर दिया था?"

राहुल गांधी किसका एजेंडा चला रहे हैं बताएं-स्मृति ईरानी

राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए स्मृति ईरानी ने आगे कहा, "क्या ये सच नहीं कि UPA के कार्यकाल में, साल 2005 में कांग्रेस पार्टी ने बिहार के विधानसभा को भंग कर दिया और सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैर-संवैधानिक करार दिया। क्यों बार-बार कांग्रेस और विशेषता राहुल गांधी चुनाव आयोग पर कटाक्ष करते हैं। बार-बार चुनाव आयोग की मर्यादा को छिन्न भिन्न करके राहुल गांधी किसका एजेंडा चला रहे है? "

September 18, 2026

राहुल ने BJP पर पार्टी तोड़ने का लगाया आरोप

बता दें कि बंगाल में चुनाव आयोग के फैसले पर राहुल गांधी ने अपने X पोस्ट में लिखा, पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।

September 18, 2026

वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 18 September 2026 at 22:36 IST