राघव चड्ढा छोड़ेंगे केजरीवाल का साथ? कुमार विश्वास, कपिल मिश्रा से कैलाश गहलोत तक.... वो बड़े नेता, जिन्होंने AAP से झाड़ा पल्ला

Delhi AAP Politics: 2012 में वजूद में आई आम आदमी पार्टी ने एक दशक में राष्ट्रीय पार्टी बनने का सफर तो तय किया, लेकिन इस दौरान कई कद्दावर नेता पार्टी से अलग हो गए। क्या इस लिस्ट में अब राघव चढ्ढा का नाम भी शामिल होगा?

Follow :  
×

Share


Delhi AAP Politics | Image: ANI

Delhi AAP Politics: साल 2012 में अन्ना हजारे के 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' के आंदोलन के बाद जन्मी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय राजनीति में 'स्वराज' और 'आंतरिक लोकतंत्र' के वादे के साथ कदम रखा था। शांति भूषण, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसी बौद्धिक शख्सियतों ने पार्टी की नींव रखी। 

लेकिन जैसे-जैसे पार्टी सत्ता की सीढ़ियां चढ़ती गई, वैचारिक मतभेद और नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। देखते ही देखते, पार्टी के कई बड़े स्तंभ एक-एक कर ढहते गए। आज स्थिति यह है कि पार्टी के शुरुआती दौर के गिने-चुने चेहरे ही केजरीवाल के साथ बचे हैं।

संस्थापक सदस्यों का निष्कासन 

पार्टी के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साल 2015 में आया, जब संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को अनुशासनहीनता के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन दोनों नेताओं ने अरविंद केजरीवाल के काम करने के तरीके और पार्टी में 'एक व्यक्ति के वर्चस्व' पर सवाल उठाए थे। इससे पहले, वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने भी आंतरिक लोकतंत्र की कमी की बात करते हुए पार्टी से किनारा कर लिया था।

और किन लोगों ने छोड़ा साथ?

शाजिया इल्मी: इससे पहले पार्टी की तेजतर्रार नेता शाजिया इल्मी ने 2014 में ही यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि पार्टी में गुटबाजी बढ़ गई है। फिर बाद में वह BJP में शामिल हो गईं थी।

कपिल मिश्रा: साल 2017 में AAP के शुरुआती नेताओं में से एक कपिल मिश्रा का भी पार्टी की नीतियों से मोह भंग होने लगा और उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। कपिल मिश्रा साल 2017 में AAP सरकार में मंत्री थे, लेकिन असहमति और पार्टी शीर्ष नेतृत्व से टकराव के कारण उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद साल 2019 में मिश्रा बीजेपी में शामिल हो गए।

कुमार विश्वास: अन्ना हजारे आंदोलन के समय से केजरीवाल के सबसे करीबी रहे कवि कुमार विश्वास का अलग होना पार्टी के लिए बड़ा झटका था। राज्यसभा सीटों के बंटवारे और अरविंद केजरीवाल से वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने 2018 में पार्टी से किनारा कर लिया था।

आशुतोष: इसके बाद पत्रकार से नेता बने आशुतोष ने भी 2018 में 'निजी कारणों' का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। हालांकि तब चर्चाएं पार्टी में उनके कद को कम किए जाने की थीं।

कैलाश गहलोत: 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, नजफगढ़ से विधायक और कद्दावर मंत्री कैलाश गहलोत ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया और BJP में शामिल हो गए। 

स्वाति मालीवाल vs पार्टी

वहीं, राज्यसभा सांसद और सोशल एक्टिविस्ट स्वाति मालीवाल और पार्टी के बीच का टकराव भी किसी से छिपा नहीं है। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने आधिकारिक तौर पर पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन उनकी बयानबाजी सीधे तौर पर नेतृत्व की नीतियों का विरोध करती दिखती हैं। हालांकि मालीवाल एक समय केजरीवाल की भरोसेमंद नेताओं में से एक मानी जाती थीं।

क्या राघव चड्ढा होंगे अलग?

दिल्ली की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा राघव चड्ढा को लेकर है। हाल ही में आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में 'उप-नेता' के पद से हटा दिया है। चड्ढा ने भी सोशल मीडिया पर पार्टी के कुछ फैसलों के खिलाफ असहमति जताई है। 

हालांकि, राघव चड्ढा ने अब तक आधिकारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन पदों से हटाया जाना और उनके बयानों पर पाबंदी लगाना इसी ओर इशारा करता है कि शीर्ष नेतृत्व और उनके बीच 'सबकुछ ठीक नहीं है'। लेकिन, यह आने वाला वक्त ही बताएगा कि चड्ढा भी उस लिस्ट में शामिल होते है या नहीं जिसमें कपिल मिश्रा, अल्का लांबा और एचएस फुल्का जैसे नाम दर्ज हैं।

ये भी पढ़ें:  CSK vs PBKS: ट्रेनिंग में लौटे एमएस धोनी, बल्लेबाजी का किया अभ्यास; पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच का होंगे हिस्सा?

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 3 April 2026 at 18:58 IST