होती है-चलती है, हो जाएगा-देखा जाएगा...स्‍वतंत्रता दिवस पर लाल किले से ऐसा क्यों बोले पीएम मोदी? जानिए संबोधन की बड़ी बातें

पीएम मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि देश बहुत सारे सपने लेकर आजाद हुआ लेकिन गति नहीं पकड़ पाया। केवल होती है-चलती है, हो जाएगा-देखा जाएगा, इसी में खोया रहे।

 
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Independence Day 2026 PM Modi | Image: YT/Grab

PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर देश को संबोधित किया। उन्होंने दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और देशवासियों के सामने पिछले 12 वर्षों की सरकारी उपलब्धियों और देश की प्रगति का उल्लेख किया।

पीएम मोदी ने लगभग 77 मिनट के भाषण में कहा कि देशवासियों के संकल्प और प्रयासों के कारण भारत ने विकास की नई रफ्तार पकड़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। देशवासियों के प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत एक बड़ी और तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में बदल गया है।

देश होती है-चलती है में खोया रहे- PM

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश अपेक्षित रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सका। हम होती है-चलती है, हो जाएगा-देखा जाएगा, इसी में खोए रहे। 2014 तक आते-आते तो पूरी दुनिया ने भारत को 'फ्रेजाइल फाइव' में डंप (शामिल) कर दिया था। ऐसे समय में पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी है। तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं। देश-राज्यों का संकल्प है कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प-सामर्थ्य को रोक पाना नामुमकिन है।

August 15, 2026

भारत ने दुनिया में लहराया परचम- PM

उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में डिफेंस प्रोडक्शन करीब 4 गुना बढ़ा, खादी एवं ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब 5 गुना हुआ, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब 7 गुना बढ़ा, आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना बढ़ा, मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा, इतना ही नहीं आधुनिक युग को लेकर भी डिजिटल और इनोवेशन की दुनिया में भी हमने अपना परचम लहराया।

'गरीबों को घर, नल से जल और…'

वे उपलब्धियों का जिक्र करते हुए आगे बोले, ‘इंटरनेट यूजर्स, इंटरनेट कंज्यूमर्स करीब-करीब 4 गुना बढ़े करीब-करीब 50 गुना बढ़े, पेटेंट ग्रांट होने की संख्या 4 गुना बढ़ी, डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े, सामान्य मानवी की सुविधा की ओर भी हमने उतनी ही गंभीरता से काम किया। हर साल औसतन 15 गुना ज्यादा तेजी से हमने नल से जल कनेक्शन दिए, हर साल औसतन 6 गुनी ज्यादा रफ्तार से लोगों को गैस कनेक्शन दिए, हर साल 4 गुनी रफ्तार से गरीबों के लिए शौचाल्य बनाने का काम किया, हर साल 3 गुना ज्यादा तेजी से गरीबों को घर देने का काम किया, देश ने गवर्नेंस में भी बहुत बदलाव लाया। सैकड़ों की तादाद में कानूनों को खत्म किया। पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं शताब्दी की मार्च नहीं हो सकती। हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेट्रो का विस्तार किया।’

भारत को आत्मनिर्भर बनना है- पीएम

पीएम ने जोर देकर कहा कि ये सभी रफ्तार, ये उपलब्धी आजादी के बाद पहली बार पिछले 1 दशक में देखी गई है। जब इतनी सारी सिद्धियां हमारे सामने है, इतनी तेज गति दिखाई देती हो, देशवासियों का सामर्थ्य पल-पल प्रकट होता है तब तो 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प कभी भी अधूरा नहीं रह सकता है। ये सारे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं। हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना है, बल्कि आत्मनिर्भर बनना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।

'2047 में हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत ने भी एक बहुत बड़ा सपना देखा है, दृढ़ संकल्प के साथ देखा है। नई ऊंचाइयों को छूने के लिए देखा है। वो सपना है जब आजादी के 100 साल होंगे, 2047 में हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे। 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है तो ये दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है। दुनिया हमारी ओर देखने का नजरिया बदलने को मजबूर हो जाती है।

कच्चे तेल का जिक्र कर क्या बोले पीएम मोदी?

वे आगे कहते हैं कि कई बार संसाधनों की कमी के कारण देश रुकता नहीं है लेकिन रुकने का कारण सोच की सीमाएं होती हैं। जब सोच बंध जाती है, सीमाओं में सड़ने लग जाती है तब हम अपने सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है और हमारी गलत सोच के कारण है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे, हमने समुद्री तट पर, 99% हमारा समुद्री तट का पूरा हिस्सा ऐसी सोच के कारण 'नो-गो एरिया' घोषित कर रखा है। हमने ही समुद्र के अंदर जाकर अन्वेषण न करने का निर्णय कर लिया था। ये सोच का दायरा था। हमने फैसला किया कि ये नहीं चल सकता। हमने उस 99 प्रतिशत क्षेत्र को 'गो-अहेड एरिया' के रूप में खुला कर दिया है। हम समुद्र के भीतर भी नए-नए भंडार खोजने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। 

'शक्ति की सप्त धारा' का किया आह्वान

इस दौरान उन्होंने 'शक्ति की सप्त धारा' का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ उस 'सप्त धारा' के सामर्थ्य से, उसकी शक्ति से हम देश को नई ऊंचाई और गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाले सामर्थ्य देंगे। इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य का भी भरपूर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा, उनकी शक्ति जोड़ी जाएगी। आने वाले दिनों में जब मैं सप्त धारा की बात करता हूं तो उसकी पहली शक्ति है मैन्यूफैक्चरिंग पावर। दूसरी कृषि और खाद्य उत्पादन, तीसरी प्रौद्योगिकी और नवाचार, चौथी गति शक्ति, पांचवी रक्षा बल, छठी ग्रीन इकॉनमी और ब्लू इकॉनमी, सांतवीं भारत की 'सॉफ्ट पावर' है। 

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Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 15 August 2026 at 09:28 IST