एक ही टेक्नोलॉजी से समुद्र का खारा पानी बनेगा मीठा, मिलेगी बिजली और दुर्लभ खनिज, भारत की किस्मत बदलने का सुनहरा अवसर
वैज्ञानिकों की रिसर्च से यह बात सामने आई है कि सिर्फ मीठा पानी ही नहीं बल्कि समुद्र के पानी से मुफ्त बिजली, नमक, लिथियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ निकाले जा सकते हैं।
राघवेन्द्र पाण्डेय
आज दुनिया में पानी और बिजली की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जमीन में मौजूद पानी लगातार नीचे जा रहा है। लोग यहां तक चर्चा करते हैं कि पानी के लिए युद्ध की संभावना भी बन सकती है। दुनिया के कई देश और शहर पानी व बिजली की कमी से कराह रहे हैं। ऐसे में समुद्र का खारा पानी भारत के लिए आर्थिक महाशक्ति का अवसर बनकर सामने आया है। जी हां, भविष्य में कुछ ऐसा ही होने वाला है। आपने सुना होगा 'एक पंथ दो काज', लेकिन यहां पर 'एक पंथ छह काज' की बात सामने आ रही है और वह भी मुफ्त।
आपको वो दृश्य तो याद होगा ही जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू समुद्र के खारे पानी से मीठे पानी का स्वाद ले रहे थे। उस टेक्नोलॉजी को देखकर प्रधानमंत्री ने मन में ही संकल्प ले लिया था कि भारत में इस टेक्नोलॉजी को लाना है।
अब वैज्ञानिकों की रिसर्च से यह बात सामने आई है कि सिर्फ मीठा पानी ही नहीं बल्कि समुद्र के पानी से मुफ्त बिजली, नमक, लिथियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ निकाले जा सकते हैं। आइए जानते हैं कि समुद्र के खारे पानी से मीठा जल, बिजली और दुर्लभ खनिज पदार्थ कैसे मिल सकता है।
समुद्र के खारा पानी से मीठा पानी और बिजली बनाने में इजरायल पहले से ही सफलता प्राप्त किया हुआ है, लेकिन वहां के मौसम के कारण ऐसा करना आसान नहीं होने वाला है। एकीकृत महासागरीय संसाधन प्रणाली (Integrated Ocean Resource System- IORS) टेक्नोलॉजी के जरिए भारत जैसे देश इसका लाभ ले सकते हैं। इसका प्रमुख कारण यहां का वातावरण और इस टेक्नोलॉजी के लिए भारत की समुद्री सीमा शत प्रतिशत उपयोगी है। आज के समय में जैसे खाड़ी देशों से कच्चे तेल की डिमांड हो रही है, वैसे ही भविष्य में भारत से पानी, बिजली और इस टेक्नोलॉजी की डिमांड होगी।
आखिर समुद्र का खारा पानी मीठा कैसे बनता है?
इस प्रक्रिया को Desalination (डिसैलिनेशन) कहते हैं। इस पद्धति से समुद्र का खारा पानी लिया जाता है, फिल्टर करके गंदगी हटाई जाती है, हाई प्रेशर मेम्ब्रेन से गुजारा जाता है, नमक को अलग किया जाता है और साफ मीठा पानी अलग हो जाता है। फिलहाल भारत में चेन्नई, लक्षद्वीप, मुंबई, गुजरात, आंध्र प्रदेश में काम चल रहा है। इसमें NIOT (National Institute of Ocean Technology) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह संस्था Ministry of Earth Sciences के अंतर्गत काम करती है।
समुद्र से मुफ्त बिजली-
OTEC (Ocean Thermal Energy Conversion) विधि से ऊपर का गर्म खारा पानी और लगभग एक हजार मीटर नीचे के ठंडे पानी के तापमान से टरबाइन घूमती है, जिससे बिजली बनती है। इस टेक्नोलॉजी से 24 घंटे सैकड़ों वर्षों तक बिजली मिलती रहेगी। टरबाइन के कारण समुद्र का गर्म पानी भाप बनता है, फिर ठंडा होकर मीठा पानी बन जाता है। इस पद्धति से नमक अलग हो जाता है। नमक के साथ उसमें लिथियम पदार्थ जिसे सफेद सोना भी कहते हैं, वो भारी मात्रा में रहता है, जिसे अलग करके लिथियम बैटरी बनाई जा सकती है। इसकी सबसे ज्यादा डिमांड इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के लिए इस वक्त हो रही है।
अलग किए गए नमक में मैग्नीशियम, पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण पदार्थ भी प्रचुर मात्रा में मिश्रित होते हैं, उनको भी अलग-अलग करके उपयोग में लाया जा सकता है। नमक का भी उपयोग दो तरह से किया जा सकता है, एक खाने के लिए और दूसरा इंडस्ट्री के लिए।
कैसे काम करती है यह पद्धति?
समुद्र के ऊपर का पानी गर्म होता है (~25–30°C) वहीं नीचे का पानी (Cold Water) 500–1000 मीटर नीचे बहुत ठंडा (~5–10°C) होता है, गर्म पानी से एक तरल पदार्थ (जैसे अमोनिया) को भाप बनाया जाता है, यह भाप टरबाइन (Turbine) घुमाती है जिससे बिजली बनती है। ठंडा समुद्री पानी उस भाप को फिर से तरल बना देता है और यह प्रक्रिया बार-बार चलती रहती है, जिससे मीठा पानी, बिजली और नमक व दुर्लभ खनिज पदार्थ प्राप्त होता है।
भारत ऐसे बन सकता है आर्थिक महाशक्ति-
जिस तरह से दुनिया में पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है, उस स्थिति में भारत के पास अथाह समुद्र की गहराई लाभदायक सिद्ध होगी। रिसर्च और टेक्नोलॉजी के माध्यम से अगर मुफ्त की बिजली, मुफ्त का मीठा पानी, मुफ्त का दुर्लभ खनिज पदार्थ और प्रचुर मात्रा में नमक मिलता हो, तो भारत इन पदार्थों का निर्यात, टेक्नोलॉजी का आदान प्रदान, मीठे पानी के निर्यात से भारत को आर्थिक महाशक्ति के रूप में बदला सकता है। हजारों वर्षों तक न समुद्र का पानी सूखने वाला है और न ही दुनिया की आवश्यकता कम होने वाली है, इसलिए यह टेक्नोलॉजी जब पूर्ण रूप से भारत विकसित कर लेगा और इससे निर्यात करने लगेगा तब भारत की किस्मत और आर्थिक स्थिति दोनों बदल जाएगी।
इस पद्धति के लिए भारत की लोकेशन परफेक्ट है। भारत (Tropical Zone- उष्णकटिबंधीय क्षेत्र) में आता है, यहां समुद्र की सतह और गहराई में तापमान का अंतर सबसे अच्छा मिलता है, OTEC के लिए (Ideal Condition) है, 24 घंटे बिजली (Non-Stop Power) मिलती रहेगी।
यहां यह भी समझने की आवश्यकता है कि- सोलर केवल दिन में चलता है, पवन चक्की (Wind) हमेशा नहीं चलती है, लेकिन OTEC दिन-रात चलता है, मौसम पर निर्भर नहीं रहता है।
यह पद्धति भारत के लिए क्यों है अनुकूल?
1. लंबी समुद्री तटरेखा का विस्तार
2. बड़े Coastal Plants की संभावना
3. रिसर्च में निवेश की संभावना
4. इजरायल से पूर्ण सहयोग
5. पानी, बिजली, खनिज से कमाई की उम्मीद
6. भारत के अधिकार क्षेत्र में मौजूद समुद्री द्वीप का उपयोग
7. इलेक्ट्रिक वाहन के लिए लिथियम बैटरी की आवश्यकता पूर्ण होगी, साथ ही मोबाइल, लैपटॉप बैटरी के उपयोगी।
8. नमक की उपलब्धता से इंडस्ट्री की आवश्यकता एवं खाने में नमक की आवश्यकता पूर्ण होगी।
9. मैग्नीशियम (Magnesium) का उपयोग उद्योग (Industry), हल्की धातु, विमान, कार, मोबाइल, एल्युमिनियम के साथ मिलाकर मजबूत (Alloy) बनता है, आतिशबाजी (Fireworks) तेज सफेद रोशनी देने के लिए इस्तेमाल, स्वास्थ्य (Health) हड्डियों और मांसपेशियों के लिए जरूरी, दवाइयों और सप्लीमेंट में उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स में उपयोगी।
10. पोटेशियम (Potassium) के उपयोग में खेती (Agriculture) के लिए खाद (Fertilizer), स्वास्थ्य के लिए जरूरी, दिल की धड़कन और नसों के लिए महत्वपूर्ण, केले (Banana) में भरपूर, खाद्य पदार्थ नमक (Low Sodium Salt) में उपयोग, उद्योग, साबुन, कांच, केमिकल बनाने में उपयोगी।
11. देश में समुद्री तट पर लगभग छोटे-बड़े 200 शहरों की मौजूदगी।
भारत की सरकार, वैज्ञानिक सक्रियता से काम करें तो आने वाले समय में जहां हम आधे भारत की समुद्र से बिजली आवश्यकता को पूर्ण कर सकते हैं, वहीं स्वच्छ मीठा पानी पूरी दुनिया को निर्यात कर सकते हैं। पानी के साथ-साथ मैग्नीशियम, पोटेशियम, लिथियम खनिज पदार्थ का भी उत्पादन हो सकता है। शुद्ध नमक से जहां लोगों के स्वाद को बदला जा सकता है। वहीं इंडस्ट्री की आवश्यकता को भी पूर्ण करते हुए निर्यात भी किया जा सकता है।
अगर समुद्र में एक पद्धति से मुफ्त का मीठा पानी, बिजली, नमक, लिथियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम का भंडार मिले, तो यह भारत के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट में भारत ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की तो आने वाले समय में भारत के लिए सबसे ज्यादा कमाई का सौदा साबित होगा।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 11 April 2026 at 16:16 IST