'मार्च करके हमें कोई डरा नहीं सकता...', राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, आचरण को लेकर देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट तक राहुल गांधी के विरोध मार्च पर CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने राहुल से उनके आचरण को लेकर जवाब मांगा है।
- भारत
- 3 min read
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उनके आचरण के लिए कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा मार्च करके कोई कोर्ट को डरा धमका नहीं सकता। CJI ने सुप्रीम कोर्ट में 12 अक्टूबर के विरोध मार्च और राहुल के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपने आचरण पर सफाई देनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनके उस बर्ताव के लिए फटकार लगाई, जो उन्होंने 12 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताने के लिए 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान किया था। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका को डराया-धमकाया नहीं जा सकता।
मार्च करके हमें कोई डरा नहीं सकता-CJI
कोर्ट की यह टिप्पणी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आई। CJI ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डरा-धमका नहीं सकता। ये सब बहुत कमजोर कोशिशें हैं। इन बातों पर कोई ध्यान नहीं देता। बाहर क्या कहा जाता है और अदालत के अंदर क्या कहा जाता है, हमें सब पता है। हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं। हमें हर बात की जानकारी है।’
कोर्ट ने आचरण को लेकर राहुल से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से विरोध प्रदर्शन को कोर्ट परिसर तक लाया गया, उस पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनों या राजनीतिक ताकत के दिखावे के जगह न्यायपालिका नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल से इस मार्च के पीछे के इरादों और इसके दौरान हुई अव्यवस्था के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने कांग्रेस नेता से कहा, "इस मार्च और इसके दौरान हुई अव्यवस्था के पीछे के अपने इरादों को स्पष्ट करें।"
राहुल गांधी के नेतृत्व में निकला था मार्च
बता दें कि 'इंडिया' गठबंधन का यह मार्च, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी ने किया था और जिसमें विपक्ष के कई अन्य नेता भी शामिल हुए थे, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग करने और चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने के लिए आयोजित किया गया था। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसमें मतदाता सूची में किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट कराना भी शामिल था।
विपक्ष ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और इस प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग की है। उनकी याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाने और उसमें किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट कराने के साथ-साथ, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में अधिक पारदर्शिता लाने की मांग की गई है।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 15 October 2026 at 14:08 IST