संसद का विशेष सत्र नहीं बुलाया जाएगा, लोकसभा में इसी हफ्ते पेश हो सकता है FCRA बिल, जानिए क्या है इसमें प्रावधान
संसद के मानसून सत्र 20 जुलाई - 13 अगस्त की अवधि बढ़ाए जाने या परिसीमन विधेयक के लिए विशेष सत्र बुलाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया है कि 16 से 18 अगस्त के बीच किसी विशेष सत्र का प्रस्ताव नहीं है। विपक्षी हंगामे के कारण सदन में लगातार गतिरोध बना हुआ है।
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संसद के वर्तमान मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक अटकलों पर अब स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने या परिसीमन विधेयक के लिए अलग से कोई विशेष सत्र बुलाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हालांकि, इस सत्र के दौरान सरकार एक महत्वपूर्ण कानून, 'विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक 2026' को पारित कराने का प्रयास कर सकती है।
मानसून सत्र का समय और विशेष सत्र पर सरकार का रुख
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और तय कार्यक्रम के अनुसार यह 13 अगस्त को समाप्त होगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि सत्र की तारीखों को आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।इसके साथ ही, 16 से 18 अगस्त के बीच महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक को लेकर किसी विशेष सत्र की खबरों को भी खारिज कर दिया गया है।
FCRA संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह नया विधेयक विदेशी अंशदान अधिनियम, 2010 में संशोधन के उद्देश्य से लाया जा रहा है। मूल FCRA कानून भारत में किसी भी व्यक्ति, संस्था या कंपनी द्वारा विदेशों से मिलने वाले चंदे की स्वीकृति और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है।सूत्रों के मुताबिक, यदि संसद में इस विधेयक पर चर्चा होती है, तो गृह मंत्री अमित शाह बहस का जवाब दे सकते हैं या चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रख सकते हैं।
रद्द या समाप्त हुए FCRA रजिस्ट्रेशन पर कड़े नियम
प्रस्तावित संशोधन विधेयक का सबसे प्रमुख प्रावधान एक 'नामित प्राधिकरण' के गठन से जुड़ा है। यह प्राधिकरण उन संगठनों की संपत्ति और विदेशी चंदे पर नजर रखेगा जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो गया है, जिन्होंने खुद इसे सरेंडर कर दिया है या जिनका पंजीकरण अब वैध नहीं रहा है। जब किसी संस्था का पंजीकरण समाप्त होगा, तो उसका बचा हुआ विदेशी फंड और संपत्तियां अस्थायी रूप से इस प्राधिकरण के पास जमा हो जाएंगी।
यदि संस्था तय समयसीमा के भीतर अपने पंजीकरण का नवीनीकरण करा लेती है, तो उसकी संपत्ति और फंड उसे वापस मिल जाएंगे। यदि निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन बहाल नहीं होता है, तो वह संपत्ति स्थायी रूप से प्राधिकरण के पास चली जाएगी।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और कानूनी अपील का अधिकार
विधेयक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि यदि किसी निष्क्रिय या रद्द हुई संस्था के पास पूजा स्थल या धार्मिक संपत्तियां हैं, तो उनका धार्मिक स्वरूप पूरी तरह बरकरार रहे। नामित प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना होगा कि धार्मिक स्थानों के चरित्र में कोई बदलाव न आए।इसके अलावा, यदि किसी संगठन को नामित प्राधिकरण के आदेश से कोई आपत्ति है, तो उसे इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने और अदालत में अपील करने का पूरा अधिकार दिया गया है।
सजा और जांच नियमों में बदलाव
प्रस्तावित कानून में कुछ नियमों को व्यावहारिक और सरल बनाने का प्रयास भी किया गया है। कानून के उल्लंघन पर मिलने वाली अधिकतम जेल की सजा को 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव है।
अब किसी भी राज्य की जांच एजेंसी को FCRA के तहत जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार से पूर्व मंजूरी लेनी होगी। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से FCRA कानून की कमियों को दूर किया जा सकेगा और विदेशों से आने वाले धन के पारदर्शी प्रबंधन में मदद मिलेगी।
संसद में जारी हंगामा और गतिरोध
दूसरी ओर, मानसून सत्र की कार्यवाही में लगातार बाधा आ रही है। विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा भी शामिल है। लगातार हो रहे हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस गतिरोध पर चिंता जताते हुए कहा कि बिना चर्चा के विधेयकों के पारित होने की स्थिति के लिए विपक्ष का रवैया जिम्मेदार है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 5 August 2026 at 22:54 IST