चाय पिलाई, खाना खिलाया और पैक करके दिया... पहलगाम हमले की NIA चार्जशीट में खुलासा, लोकल गाइड चाहते तो बच जाती 26 पर्यटकों की जान
NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा मुख्य आरोपी बनाया गया। हमले से पहले तीन आतंकियों ने लोकल गाइड परवेज और बशीर की झोपड़ी में 5 घंटे रुककर खाना-चाय ली और जानकारी हासिल की। पाकिस्तान में खरीदे गए मोबाइल फोन और फॉल्स फ्लैग साजिश का भी खुलासा हुआ।
Pahalgam Terror Attack: 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमले ने पूरे देश को दहला दिया था। आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदू पर्यटकों पर गोलियां चलाई थीं। इस आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।
NIA की चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा/द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) का पाकिस्तान स्थित हैंडलर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ 'लंगड़ा' को आरोपी नंबर-1 बनाया गया है। साथ ही हमले में लोकल सपोर्ट का भी प्रमाण मिला है। NIA का मानना है कि समय रहते सूचना दी जाती, तो 26 निर्दोषों की जान बचाई जा सकती थी।
NIA चार्जशीट के अनुसार स्थानीय गाइड परवेज और बशीर अहमद चाहते, तो 26 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। ये वो ही गाइड हैं, जो घाटी में आए पर्यटकों के पैसों पर अपने परिवार का पेट पालते हैं। दो स्थानीय गाइड ने हमले से एक दिन पहले आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी।
लोकल गाइडों ने दी आतंकियों को मदद
NIA चार्जशीट के अनुसार, पर्यटक गाइड परवेज और बशीर अहमद ने आतंकियों की मदद की। हमले से एक दिन पहले यानी 21 अप्रैल को आतंकी फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी परवेज की झोपड़ी (ढोंक) में करीब 5 घंटे रुके थे।
आतंकियों ने वहां खाना खाया, चाय पी, पानी लिया, जाते वक्त राशन और बर्तन भी साथ ले गए। दोनों गाइड समझ गए थे कि वे हथियारबंद मुजाहिद (आतंकी) हैं। आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों के कैंप और मूवमेंट की जानकारी भी ली।
दोनों गाइडों ने आतंकियों को खाना खिलाया, चाय पिलाई और खाना पैक करके भी दिया। मदद के बदले आतंकियों ने लगभग 3000 रुपये दिए। हमले वाले दिन भी दोनों ने बैसरन पार्क के बाहर फेंस पर बैठे आतंकियों को देखा, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को कोई सूचना नहीं दी। हमला होने के बाद दोनों अंडरग्राउंड हो गए।
मुख्य आरोपी साजिद जट्ट 'लंगड़ा'
NIA चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। लाहौर में बैठा यह आतंकी तीनों हमलावरों का हैंडलर था। हमले के दौरान वह लगातार आतंकियों से संपर्क में था और रियल टाइम निर्देश दे रहा था। लोकेशन और कोऑर्डिनेट भी भेज रहा था। साजिद जट्ट का एक पैर गोली लगने से कट चुका है, इसलिए वह नकली टांग लगाता है और 'लंगड़ा' के नाम से जाना जाता है।
कौन है साजिद जट्ट 'लंगड़ा'?
साजिद जट्ट 'लंगड़ा' 2005 में पाकिस्तान से घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर आया था। वो पाकिस्तान के कसूर का रहने वाला है। कुलगाम और दक्षिण कश्मीर में लोकल युवाओं का ब्रेनवॉश कर लश्कर नेटवर्क खड़ा किया। धारा 370 हटने के बाद TRF बनाने में अहम भूमिका निभाई। कुलगाम में शब्बीरा नाम की महिला से शादी की। बाद में पत्नी के साथ पाकिस्तान भाग गया, बेटा अभी भी कश्मीर में है।
लंगड़ा ने ही कुलगाम में लोकल ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) नेटवर्क तैयार किया और कई बड़े हमलों में शामिल रहा। NIA ने उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा है। NIA ने उसके बेटे का बयान दर्ज कर तस्वीर की पहचान कराई।
पाकिस्तान से खरीदे गए मोबाइल फोन
ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीनों आतंकियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए। NIA जांच में पता चला कि
- एक फोन (IMEI: 865792067481628/865792067481636) पाकिस्तान के लाहौर के कोट लखपत, कायद-ए-आजम इंडस्ट्रियल एस्टेट के पते पर ऑनलाइन खरीदा गया।
- दूसरा फोन (IMEI: 867906051958387/867906051958395) कराची के शाहरा इलाके के पते पर खरीदा गया।
यह साफ संकेत है कि पूरी साजिश पाकिस्तान में रची गई और आतंकी पाकिस्तानी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। हमले के बाद TRF ने 'Kashmir fight' नाम के टेलीग्राम चैनल से जिम्मेदारी ली। NIA जांच में पाया कि यह चैनल खैबर पख्तूनख्वा के बट्टाग्राम से ऑपरेट हो रहा था। जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हमले की निंदा की, तो TRF ने दावा किया कि चैनल हैक हो गया था और हमले से इनकार कर दिया।
NIA की जांच जारी
NIA चार्जशीट में साजिद जट्ट की तस्वीर, उसके पाकिस्तान स्थित घर का पता और वीडियो समेत ठोस सबूत शामिल किए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि 15-16 अप्रैल को ही हमले की साजिश रची गई और आतंकियों को बेसरन घाटी भेजा गया था।
यह हमला न सिर्फ पाकिस्तान प्रायोजित था, बल्कि OGW और गाइड्स के सहयोग से अंजाम दिया गया। सुरक्षा बलों की कार्रवाई और NIA की जांच से कश्मीर में आतंक के नेटवर्क को तोड़ने के प्रयास तेज हो गए हैं।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 20 May 2026 at 23:51 IST