हजारों की संख्या में यात्री, ट्रेन में देरी और ऐन वक्त पर प्लेटफॉर्म 16 वाला अनाउंसमेंट...भगदड़ में 18 मौत का जिम्मेदार कौन?
अनगिनत चप्पलें, जूते और सैंडिलें.. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के बाद जब भीड़ छंटी तो प्लेटफार्म और फुटओवर ब्रिज के रास्तों पर इन्हीं चीजों के ढेर लगे थे।
Responsible Delhi Station Stampede: अनगिनत चप्पलें, जूते और सैंडिलें.. मफलर, रूमाल, दुपट्टे और बैग... नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के बाद जब भीड़ छंटी तो प्लेटफार्म और फुटओवर ब्रिज के रास्तों पर इन्हीं चीजों के ढेर लगे थे। ये सिर्फ सामान नहीं, बल्कि उन जिंदगियों की निशानियां थीं, जो कुछ घंटे पहले तक हंसते-बोलते सफर पर निकली थीं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि ये सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
अगर उन लोगों को ये पता होता कि नई दिल्ली स्टेशन पर भीड़ इतनी है कि उनके शरीर पर चढ़कर भीड़ उन्हें कुचल देने वाली है तो शायद वो अपने घर से निकलते ही नहीं। शनिवार की रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 9 बजकर 26 मिनट पर भगदड़ मच गई, क्योंकि प्लेटफोर्म पर हजारों यात्री प्रयागराज जाने के लिए स्टेशन पर उमड़े थे...इसी बीच ऐन वक्त पर ट्रेन के प्लेटफॉर्म बदलने की अनाउंसमेंट ने हालात को और बिगाड़ दिया।
सहेलियों साथ जा रही थी सोनीपत की संगीता
हरियाणा के सोनीपत की संगीता मलिक अपनी सहेलियों के साथ प्रयागराज जा रही थीं। उनकी भी मौत हो गई है। नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ में जान गंवाने वाली बच्ची सुरुचि अपने पापा, नाना-नानी के साथ स्टेशन पहुंची थी। भगदड़ में सुरुचि और उसके नाना-नानी की मौत हो गई।
एक ही रात में उजड़ गया घर- राजकुमार
दिल्ली से बिहार के नवादा जा रहे राजकुमार मांझी का परिवार पहले 4 सदस्यों का था। अब सिर्फ 2 बचे हैं। उनकी पत्नी और मासूम बेटी इस भगदड़ का शिकार हो गईं। बदहवास राजकुमार पूरे स्टेशन पर उन्हें खोजते रहे, लेकिन जब रेलवे की लिस्ट में उनकी मौत की पुष्टि हुई, तो वे पूरी तरह टूट गए। 'बेटा जिंदा है, लेकिन कहां है पता नहीं... किसी ने फोन कर बताया कि वो सुरक्षित है, लेकिन मेरे लिए अब कुछ भी वैसा नहीं रहेगा'। राजकुमार की सूनी आंखें सब बयां कर रही थीं।
हम सोच ही रहे थे घर लौट जाएं, लेकिन तभी…
वहीं, संगम विहार की रहने वाली रुखसाना अपने परिवार के साथ प्रयागराज जाने के लिए स्टेशन पर थीं। प्लेटफॉर्म पर इतनी भीड़ थी कि खड़े होने तक की जगह नहीं थी। रुखसाना बताती हैं कि 'हमने सोचा कि किसी तरह वापस घर लौट जाएं, लेकिन तभी अफरा-तफरी मच गई। मेरी ननद भीड़ में गिर गई और दब गई। जब तक उसे उठाया, वह दम तोड़ चुकी थी।' रुखसाना की चीखों ने स्टेशन के माहौल को और भारी कर दिया।
धक्के, चीखें और जिंदगी की आखिरी सांसें
यात्रियों की भारी भीड़ अचानक 14 और 15 नंबर प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ी। कुछ लोग ट्रेन के इंजन के आगे गिर गए, कुछ सीढ़ियों पर कुचल गए और कुछ की मौत दम घुटने से हो गई।
रेलवे प्रशासन की नाकामी
चश्मदीदों ने बताया कि भीड़ नियंत्रण के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। 'अनाउंसमेंट गलत हुआ, प्लेटफॉर्म बदला गया, भीड़ इधर-उधर भागी और फिर यह हादसा हो गया। कुलियों और यात्रियों ने खुद घायलों को बचाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन गायब था।'
भगदड़ से बचने के लिए फुटओवर ब्रिज से कूदे लोग
कुछ यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए फुटओवर ब्रिज से प्लेटफॉर्म पर छलांग लगा दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद रेलवे प्रशासन अब सफाई में जुटा है, लेकिन सवाल वही है कि 18 मौतों का जिम्मेदार कौन है?
Photo : कंधे पर बैग और बच्चे, चीखते लोग

Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 16 February 2025 at 12:28 IST





