भारतीय विरासत की घर वापसी, नीदरलैंड ने लौटाई चोल साम्राज्य विरासत, PM मोदी ने शेयर की 11वीं सदी की बेशकीमती धरोहर की तस्वीर
पीएम नरेंद्र मोदी अपनी 5 दिन की विदेश यात्रा के दूसरे पड़ाव मे नीदरलैंड पहुंच चुके हैं। इस बीच नीदरलैंड सरकार ने सदियों पुरानी अनैमंगलम ताम्रपत्र भारत को वापस दिए हैं, जिसकी तस्वीर पीएम मोदी ने शेयर की है। पीएम मोदी ने लिखा '11वीं शताब्दी के चोल ताम्रपत्र नीदरलैंड से भारत वापस लाए जा रहे हैं।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 5 दिन की विदेश यात्रा के पहले पड़ाव UAE के बाद अब दूसरे पड़ाव में वो नीदरलैंड पहुंच चुके हैं। इस बीच पीएम मोदी के इस दौरे पर नीदरलैंड ने भारत को एक खास तोहफा दिया है। नीदरलैंड ने औपचारिक रूप से सदियों पुरानी अनैमंगलम तांबे की प्लेटें (ताम्रपत्र) भारत को वापस सौंप दी है।
नीदरलैंड द्वारा ताम्रपत्र लौटाए जाने पर पीएम मोदी ने भी खुशी जाहीर की है। पीएम मोदी ने अनैमंगलम तांबे की प्लेटें की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा 'हर भारतीय के लिए यह एक खुशी का पल है! 11वीं शताब्दी के चोल ताम्रपत्र नीदरलैंड से भारत वापस लाए जा रहे हैं।' बता दें कि यह औपनिवेशिक काल के दौरान ले जाई गई सांस्कृतिक विरासतों की वापसी में एक बड़ा कदम है।
ताम्रपत्र लौटने पर PM मोदी ने क्या कहा?
नीदरलैंड सरकार द्वारा सदियों पुरानी अनैमंगलम ताम्रपत्र भारत लौटाए जाने पर पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा 'हर भारतीय के लिए एक खुशी का पल है। 11वीं सदी के चोल ताम्रपत्र नीदरलैंड से भारत वापस लौट आएंगे। मैंने प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की उपस्थिति में आयोजित समारोह में भाग लिया। चोल ताम्र-पत्रों में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं और इनमें शामिल लेख तमिल भाषा में हैं, जो दुनिया की सबसे मशहूर शान में से एक है।'
आगे पीएम मोदी ने कहा ‘ये ताम्र-पत्र महान प्रजाती चोल प्रथम से जुड़े हुए हैं, जिनके पिता राजा राजा हैं। प्रथम द्वारा एक प्रतीकात्मक वादे को अभिव्यक्त किया गया था। ये चोलों की महानता को भी महत्व देते हैं। हम भारतवासी चोलों, उनकी संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर अत्यंत गर्व महसूस करते हैं। मैं नीदरलैंड की सरकार और विशेष रूप से लीडेन विश्वविद्यालय का अभिप्राय हूं, जहां ये ताम्रपत्र 19वीं सदी के मध्य से रखे गए थे।’
चोल वंश से जुड़ा है ये ताम्रपत्र
रिपोर्ट्स के अनुसार ये ताम्रपत्र 985 और 1014 ईस्वी के बीच सम्राट राजराज चोल प्रथम के शासनकाल के हैं। कई इतिहासकार इन प्लेटों को तमिल संस्कृति और विरासत का बेहद अहम हिस्सा मानते हैं। बताया जा रहा है कि इन तांबे की प्लेटों में नागपट्टिनम में बने एक बौद्ध मठ 'चूड़ामणि विहार' को दी गई जमीन, कर और राजस्व से जुड़े अनुदानों का जिक्र है।
अन्नामंगलम तांबे की प्लेट क्यों है खास?
रिपोर्ट्स के अनुसार ये ताम्रपत्र भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों का गवाह रहा है। कई इतिहासकारों का मानना है कि ये ताम्रपत्र 18वीं शताब्दी में कोरोमंडल तट पर डच औपनिवेशिक शासन के दौरान नीदरलैंड ले जाए गए थे। ये एक गोलाकार तांबे की रिंग द्वारा आपस में बंधी हुई हैं। इस पर शाही चोल मुहर लगी हुई है। बताया जा रहा है कि इनका वजन लगभग 30 किलोग्राम है।
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 16 May 2026 at 22:31 IST