संसद में महिला आरक्षण जैसे बिलों को पास करने की कवायद के बीच NDA के लिए अच्छी खबर, NCP बोली- मुद्दों पर आधारित समर्थन के लिए दरवाजा खुले...

NCP शरद गुट के NDA में शामिल होने की चर्चा के बीच पार्टी के नेता जितेंद्र आव्हाड ने खुलकर कह दिया, 'NDA को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने के लिए दरवाजे खुले हैं।'

 
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Sharad Pawar and PM Narendra Modi. | Image: X

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) शरद गुट के NDA में शामिल होने की चर्चा मुंबई से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में जोर-शोर से चल रही है। बीते दिनों शरद पवार से जब एनडीए में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया था, तो उन्होंने ना हां कहा था और ना ही ना कहा था। चुप्पी साधते हुए सवाल को टाल दिया था। मगर सोमवार को NCP नेता जितेंद्र आव्हाड ने खुलकर कह दिया कि 'NDA को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने के लिए दरवाजे खुले हैं।'

संसद में संख्या बल को लेकर चल रही जबरदस्त चर्चा के बीच, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा है कि उनकी पार्टी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका रुख पूरी तरह से संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित है।

NDA में शामिल होने की अटकलों पर जितेंद्र आव्हाड ने क्या कहा?

रिपब्लिक से खास बातचीत में आव्हाड ने कहा, "हम उसी चीज का समर्थन कर रहे हैं जो संवैधानिक रूप से सही है। मुझे नहीं लगता कि कोई अटकलें लगाई जानी चाहिए। मैं अटकलों का जवाब देने के लिए यहां नहीं हूं; मैं सिर्फ तथ्य बताने के लिए यहां हूं। राजनीतिक गठजोड़ में बदलाव की अफवाहों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।"

July 20, 2026

सुप्रिया सुले ने भी किया था बड़ा इशारा

जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि पार्टी हर मामले को उसकी असलियत और मेरिट के आधार पर परखती है। हमारी पार्टी NDA को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने के लिए तैयार है। उनके यह बयान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी मेल खाता है। इससे पहले NDA में शामिल होने के सवाल पर सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि पार्टी किसी भी मामले पर अपना रुख तय करने से पहले विधायी बिलों( Legislative bills) की पूरी तरह से समीक्षा करेगी।

NDA क्यों दे रही NCP को शामिल करने पर जोर?

बता दें केंद्र सरकार संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है। मौजूदा सत्र के लिए तय किए गए कुछ खास बिल भी शामिल है। इसके लिए सदन में दो तिहाई बहुमत चाहिए। ऐसे में NDA के पार्टी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि NCP के दोनों गुट आपस में फिर से मिल जाएं और एनडीए की सहयोगी पार्टी बन जाएं। इससे फैसले NDA की स्थिति और मजबूत हो जाएगी। अब देखने होगा कि NCP(SP) क्या फैसला लेती है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 20 July 2026 at 18:06 IST