अपडेटेड 2 March 2025 at 21:58 IST

राष्ट्रीय शिक्षा नीति हिंदी नहीं थोपेगी, तमिलनाडु का दावा निराधार और राजनीतिक: शिक्षा मंत्री प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि एनईपी राज्यों पर हिंदी नहीं थोपेगी और इस संबंध में तमिलनाडु के विरोध के पीछे ‘‘राजनीतिक कारण’’ हैं।

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Union Education Minister Dharmendra Pradhan. | Image: PTI

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) राज्यों पर हिंदी नहीं थोपेगी और इस संबंध में तमिलनाडु के विरोध के पीछे ‘‘राजनीतिक कारण’’ हैं।

प्रधान ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने एनईपी-2020 में कभी नहीं कहा कि केवल हिंदी होगी। हमने केवल यह कहा है कि शिक्षा मातृभाषा पर आधारित होगी, तमिलनाडु में यह तमिल होगी।’’

शिक्षा मंत्री की यह टिप्पणी एनईपी और तीन भाषा नीति के कार्यान्वयन को लेकर तमिलनाडु सरकार और केंद्र में टकराव के बीच आई है।

प्रधान ने कहा, ‘‘मैं कुछ लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का जवाब नहीं देना चाहता। एनईपी-2020 भारत की विभिन्न भाषाओं पर केंद्रित है, चाहे वह हिंदी हो, तमिल हो, उड़िया हो या पंजाबी। सभी भाषाओं का समान महत्व है। तमिलनाडु में कुछ लोग राजनीति के कारण इसका विरोध कर रहे हैं।’’

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शुक्रवार को कहा था कि कृत्रिम मेधा (एआई) के युग में स्कूलों में किसी भी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में लागू करना अनावश्यक है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘उन्नत अनुवाद तकनीक पहले ही भाषा संबंधी बाधाओं को तुरंत दूर कर देती है। छात्रों पर अतिरिक्त भाषाओं का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।’’

 

Published By : Kanak Kumari Jha

पब्लिश्ड 2 March 2025 at 21:58 IST