अपडेटेड 31 January 2024 at 18:19 IST

Budget 2024: कार खरीदने वालों का बजट पर रहता है ध्यान, जानिए ऑटो सेक्टर को कितनी उम्मीदें

Budget 2024: अंतरिम बजट से ऑटो सेक्टर, खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां, बैटरी चालित गाड़ियां और दोपहिया वाहनों को लेकर लोगों की उम्मीदें हैं।

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बजट | Image: Shutterstock

Interim Budget 2024: संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। अब पूरे देश को इंतजार अंतरिम बजट पेश होने का है। भले ये केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतरिम बजट हो, लेकिन इससे भी उम्मीदें लोगों की काफी हैं। एक फरवरी को केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अंतरिम बजट पेश करेंगी।

देश में ऑटो सेक्टर तेजी से ग्रोथ कर रहा है। वाहनों की खरीददारी पिछले कुछ समय से नए रिकॉर्ड बताती आ रही है। 31 जनवरी 2024 को संसद में दिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के मुताबिक, पिछले 10 साल में 21 करोड़ से अधिक वाहन लोगों ने खरीदे हैं।

साल 2023-24 में 12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के मुताबिक, 2014 से पहले के 10 सालों में लगभग 13 करोड़ वाहन बिके थे। पिछले 10 सालों में देशवासियों ने 21 करोड़ से अधिक वाहन खरीदे हैं। यही नहीं, 2014-15 में लगभग 2 हजार इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, जबकि 2023-24 में दिसंबर महीने तक ही लगभग 12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं।

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अब बजट से ऑटो सेक्टर को ज्यादा उम्मीदें?

इस लिहाज से अंतरिम बजट से ऑटो सेक्टर, खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां, बैटरी चालित गाड़ियां और दोपहिया वाहनों को लेकर लोगों की उम्मीदें हैं। वाहन क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियों का मानना है कि सरकार को आगामी बजट में हरित परिवहन को बढ़ावा देने की नीति को जारी रखने की जरूरत है। उनका कहना है कि इसके अलावा बुनियादी ढांचा क्षेत्र की विकास की रफ्तार को भी कायम रखने की जरूरत है।

बजट पर क्या कहते हैं ऑटो सेक्टर के दिग्गज?

पीटीआई के मुताबिक, मर्सिडीज बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संतोष अय्यर कहते हैं, 'सरकार को ग्रीन मोबिलिटी के लिए नीतिगत प्रोत्साहन पर ध्यान जारी रखना चाहिए। इससे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी।' उन्होंने ये भी कहा कि हमारा अनुमान है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय जारी रहेगा।

अय्यर ने कहा कि लक्जरी कार उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में यह क्षेत्र चाहता है कि प्राथमिकता के आधार पर शुल्क ढांचे और जीएसटी को सुसंगत किया जाए। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हमें आगामी बजट में किसी तरह के आश्चर्य की उम्मीद नहीं है।

फिलहाल लक्जरी वाहनों पर 28 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगता है। साथ ही सेडान पर 20 प्रतिशत और एसयूवी पर 22 प्रतिशत का अतिरिक्त उपकर लगता है। ऐसे में इन वाहनों पर कुल कर करीब 50 प्रतिशत बैठता है।

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टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के उप-प्रबंध निदेशक स्वप्नेश आर मारू कहते हैं, 'कंपनियों को भरोसा है कि सरकार अर्थव्यवस्था और परिवहन क्षेत्र को एक ऐसे हरित भविष्य में बदलने की दिशा में अपनी कोशिश जारी रखेगी, जो जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भर हो।

जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रघुपति सिंघानिया ने कहा कि ऑटो सेक्टर के लिए नीतियों से इस क्षेत्र का विस्तार होगा।

महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी की प्रबंध निदेशक और सीईओ सुमन मिश्रा कहते हैं, 'हम बजट में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और विनिर्माण (फेम) की योजना के जरिए इस क्षेत्र को प्राथमिकता देने की उम्मीद करते हैं।'

(पीटीआई इनपुट के साथ)

Published By : Amit Bajpayee

पब्लिश्ड 31 January 2024 at 18:03 IST