तोप के गोले भी बेअसर, छत्रपति शिवाजी का खजाना और बिच्छू के डंक जैसा आकार...जानिए लोहागढ़ किले का इतिहास जहां सिया ने केतन को दी मौत

Lohgarh Fort: सिया, पैसा और वो हुडी इस उलझी हुई मर्डर मिस्ट्री का सबसे बड़ा केंद्र भरतपुर का ऐतिहासिक लोहागढ़ किला बना। आखिर केतन की हत्या के लिए कातिल ने इसी जगह को क्यों चुना? आइए इस लेख में लोहागढ़ किले के इतिहास के बारे में जानते हैं।

 
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mumbai-money-hoodie-and-ketan-murder-lohgarh-fort-history-know-mystery-behind-it | Image: Social Media

Lohagarh Fort: क्राइम, थ्रिलर और मिस्ट्री से भरी कहानियां अक्सर हमें झकझोर कर रख देती हैं। हाल ही में सुर्खियों में आया 'केतन हत्याकांड' भी कुछ ऐसा ही है, जिसके तार तीन मुख्य बिंदुओं के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं 'सिया', 'पैसा' और वारदात के वक्त कातिल के बदन पर मौजूद 'वो हुडी'। लेकिन इस पूरी खूनी साजिश में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है वारदात की जगह। कातिलों ने केतन की हत्या के लिए राजस्थान के भरतपुर में स्थित ऐतिहासिक 'लोहागढ़ किला' ही क्यों चुना? क्या यह महज एक इत्तेफाक था या इसके पीछे कोई गहरी सोची-समझी साजिश थी? 
आइए जानते हैं कि आखिर लोहागढ़ किले का इतिहास क्या है?

क्यों चुना गया लोहागढ़ किला?

भरतपुर का लोहागढ़ किला भारत के सबसे मजबूत और एकमात्र 'अजेय दुर्ग' के रूप में जाना जाता है। इसका इतिहास इतना दिलचस्प है कि इसे सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।लोहागढ़ का मतलब है 'लोहे जैसा मजबूत किला' जिसे कोई हिला न सके।इस किले का निर्माण 18वीं शताब्दी (साल 1733) में जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। उन्होंने इसे पारंपरिक पत्थरों के बजाय एक बेहद अनूठी और वैज्ञानिक तकनीक से बनवाया, जो उस दौर के हिसाब से बेमिसाल थी। लोहागढ़ किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी दोहरी दीवारें हैं। अंदर की दीवार पत्थरों की है, जबकि बाहर की दीवार पूरी तरह से पक्की मिट्टी  की बनी है। जब भी दुश्मन इस किले पर तोप से गोले दागते थे, तो वे गोले मिट्टी की मोटी दीवार में धंस जाते थे और उनकी आग शांत हो जाती थी। इससे किले की मुख्य इमारत को खरोंच तक नहीं आती थी।

किले के चारों तरफ एक गहरी खाई है, जिसमें 'मोती झील' से सुजान गंगा नहर के जरिए पानी लाया जाता था। इस पानी में खूंखार मगरमच्छ छोड़े जाते थे, ताकि कोई भी दुश्मन तैरकर किले के करीब न आ सके। इस किले की मजबूती का सबसे बड़ा सबूत यह है कि साल 1805 में ब्रिटिश कमांडर लॉर्ड लेक ने अपनी विशाल सेना और आधुनिक तोपों के साथ इस पर लगातार 5 बार हमला किया। अंग्रेज हर बार नाकाम रहे और उन्हें भारी नुकसान उठाकर पीछे हटना पड़ा। तभी से इसे 'लोहागढ़' कहा जाने लगा।

लोहागढ़ किले को कहते हैं बिच्छू की पूंछ

भरतपुर के लोहागढ़ किले की सबसे अनूठी और रणनीतिक संरचनाओं में से एक है 'विंचू काटा', जिसे अपनी खास बनावट के कारण बिच्छू की पूंछ भी कहा जाता है। किले का यह लंबा और संकरा हिस्सा मुख्य इमारत से बाहर की ओर निकला हुआ है। देखने में बेहद आकर्षक होने के साथ-साथ इतिहास में इसका रणनीतिक और सैन्य महत्व बहुत बड़ा था। 

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 25 June 2026 at 09:41 IST