अपडेटेड 7 March 2026 at 10:07 IST

बंगाल चुनाव से पहले SIR को लेकर ममता ने छेड़ी सियासी जंग, रातभर टेंट में बैठी रहीं CM, BJP और चुनाव आयोग पर लगाए ये आरोप

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले SIR को लेकर राजनीति गर्मा रही है। सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के दौरे से पहले धरना शुरू कर दिया है। उन्होंने कथित षड्यंत्र को बेनकाब करने की बात कही।

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सीएम ममता बनर्जी ने दिया धरना | Image: X

Mamata Banerjee news: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। शुक्रवार (6 मार्च) को सीएम ममता बनर्जी SIR प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में धरने पर बैठ गईं। उन्होंने सेंट्रल कोलकाता में धरना शुरू किया। वो रात भर टेंट में बैठी रहीं। 

उन्होंने धरना शुरू करते हुए बीजेपी और चुनाव आयोग पर बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने' की साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि वो इस कथित षड्यंत्र को बेनकाब करेंगी।

यह प्रदर्शन राज्य में चुनाव आयोग के प्रस्तावित दौरे से दो दिन पहले हो रहा है। 8 मार्च को चुनाव आयोग की टीम पश्चिम बंगाल पहुंचेगी और यह दौरा 10 मार्च तक चलेगा। टीम राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठक करेगी।

रातभर टेंट में रुकी रहीं CM ममता

शुक्रवार दोपहर 2 बजे के आसपास सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में इस धरने की शुरुआत कोलकाता के मध्य इलाके धर्मतल्ला में मेट्रो चैनल पर हुई। मंच पर उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। वहीं, मौके पर हजारों की संख्या में समर्थक भी जुटे। रात में सीएम ममता ने सभी नेताओं को घर जाकर आराम करने को कहा। वो वहां खुद रातभर टेंट में रुकी रहीं। शनिवार (7 मार्च) को दोबारा इस धरने की शुरुआत होगी।

‘मैं उन लोगों को मंच पर लाऊंगी, जिन्हें…’

इस दौरान TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं को चुनाव आयोग ने मृत घोषित किया है, लेकिन वे वास्तव में जीवित हैं, उनको वो मंच पर लाकर दिखाएंगी।

बंगाल SIR में 63 लाख नाम कटे 

चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल की संशोधित मतदाता सूची जारी की थी।  आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले साल नवंबर में SIR अभियान शुरू होने के बाद अब तक कुल मिलाकर लगभग 63.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं के करीब 8.3 प्रतिशत के बराबर है। इसके बाद मतदाताओं की कुल संख्या 7.66 करोड़ से घटकर अब 7.04 करोड़ के आसपास पहुंच गई है।  

इसके अलावा, 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं को अभी 'विचाराधीन' या 'न्यायिक जांच के अधीन' श्रेणी में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अगले कुछ हफ्तों में न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उनकी योग्यता और पात्रता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 7 March 2026 at 10:07 IST