महाराष्ट्र में फिर होने वाला है बड़ा खेला! दोनों NCP का विलय, फिर शरद गुट की NDA में एंट्री संभव; मुंबई से दिल्ली तक बढ़ी सियासी हलचल
महाराष्ट्र में NCP शरद पवार की पार्टी को NDA में शामिल होने को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दोनों NCP के विलय की भी चर्चा जोरों पर है।
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महाराष्ट्र में सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों को लेकर चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के अनुसार, शरद पवार गुट की NCP को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल करने पर गंभीर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि अगले 8 से 15 दिनों के अंदर इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। वहीं, दोनों NCP के विलय की भी संभावना प्रबल हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक दो मुख्य फॉर्मूले पर मंथन हो रहा है। पहला फॉर्मूला दोनों NCP गुटों के विलय का है, जिसके बाद दोनों मिलकर NDA में शामिल हो सकते हैं। दूसरा फॉर्मूला, यदि मर्जर संभव नहीं हो पाता, तो शरद पवार की NCP अलग राजनीतिक इकाई के रूप में NDA से जुड़े या सरकार को भीतर अथवा बाहर से समर्थन दे। हालांकि, शरद पवार गुट के अधिकांश विधायक और सांसद सीधे NDA में शामिल होने के पक्ष में।
NDA में शामिल हो सकती है शरद पवार की NCP
शरद पवार गुट के विधायकों का मानना है कि केंद्र और महाराष्ट्र दोनों सरकारों में भागीदारी मिलने से पार्टी संगठन मजबूत होगा, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी का विस्तार आसान हो जाएगा। केवल बाहर से समर्थन देने की स्थिति में राजनीतिक लाभ सीमित रहने की संभावना है। फैसले में देरी होने पर पार्टी में टूट की आशंका भी जताई जा रही है।
दोनों NCP के विलय की चर्चा
वहीं, दूसरी ओर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार दोनों NCP के विलय के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि यदि दोनों NCP का मर्जर होता है, तो पार्टी पर उनका प्रभाव कम हो सकता है और संगठन पर उनका नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है। अजित पवार की NCP के भीतर भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। पार्टी के भीतर दो गुट बन गए हैं, पहला गुट: सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार। दूसरा गुट: प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे।
अजित पवार के निधन के बाद पार्टी में मतभेद
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी कार्यशैली को लेकर असंतोष बढ़ा है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। पार्टी के अंदर का मतभेद उस समय बाहर आ गया, जब चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के नाम शामिल नहीं था।
NDA की बड़ी प्लानिंग
मीडिया रिपोरर्टेस के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है। इसके लिए सदन में दो तिहाई बहुमत चाहिए। ऐसे में NDA के पार्टी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि NCP के दोनों गुट आपस में फिर से मिल जाएं और एनडीए की सहयोगी पार्टी बन जाएं। इससे फैसले NDA की स्थिति और मजबूत हो जाएगी।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 18 July 2026 at 09:46 IST