छावनी में तब्दील भोजशाला, शुक्रवार हो होगी महाआरती... प्रशासन ने किया फ्लैगमार्च; सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले को प्रशासन की खुली चेतावनी
मध्य प्रदेश के धार में 721 साल बाद शुक्रवार को भोजशाला में हिंदू पक्ष द्वारा भव्य महाआरती का आयोजन करेगा। इंदौर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार शुक्रवार को पूजा-अर्चना संभव हुई है। सुरक्षा को देखते हुए 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।
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Dhar Bhojshala Temple: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में इंदौर हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद पहला शुक्रवार आ गया है। हिंदू संगठनों ने इस मौके पर महाआरती करने की तैयारी की है, जिसके चलते पूरे शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने धार को छावनी में बदल दिया है।
इंदौर हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को माता वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है। कोर्ट ने ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, परिसर की संरचना, स्तंभों पर हिंदू प्रतीक और संस्कृत अभिलेखों को आधार बनाया। इससे पहले 2003 के ASI आदेश के अनुसार हिंदुओं को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी को पूजा की अनुमति थी, जबकि शुक्रवार को नमाज पढ़ी जाती थी। अब स्थिति बदल गई है।
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि 721 साल बाद ऐसा शुक्रवार आया है जब हिंदू समाज भोजशाला में पूजा कर सकेगा। उन्होंने दोपहर में जुलूस निकालकर महाआरती करने की बात कही। इसके साथ ही प्रशासन ने भी अपने तैयारी शुरू करदी।
1500 से अधिक पुलिसकर्मी
जिला प्रशासन और पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। पूरे शहर में नौ लेकर की सुरक्षा तैयार की गई है। 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। फ्लैग मार्च निकाला गया, जिसमें कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया पर सख्त नजर रखी जा रही है, आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई होगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के फैसले का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा और शांति बनाए रखने की अपील की। एसपी सचिन शर्मा ने साफ शब्दों में कहा-
"जिसको लगता है कि वो कल कुछ कर सकता है वो कोशिश कर ले, उसके बाद उसके ऊपर वो कार्रवाई होगी जो उसने कभी नहीं सोचा होगा।"
महाआरती का कार्यक्रम
हिंदू संगठन दोपहर 1 बजे अखंड ज्योति मंदिर में एकत्रित होंगे। वहां से 1 से 3 बजे तक भोजशाला में मां वाग्देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान पूर्व भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए कार्यकर्ताओं के परिजनों, लाठी-गोली से घायल और जेल गए लोगों का सम्मान भी किया जाएगा।
ऐतिहासिक महत्व
भोजशाला राजा भोज द्वारा निर्मित ज्ञान का केंद्र मानी जाती है। ASI के संरक्षण में यह परिसर सदियों से विवाद का विषय रहा है। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार में स्थित भोजशाला परिसर एक मध्यकालीन ऐतिहासिक स्मारक है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह राजा भोज (परमार वंश, 11वीं शताब्दी) द्वारा निर्मित देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत विद्या का प्रमुख केंद्र (भोजशाला) है। जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 21 May 2026 at 23:42 IST