'कुल 12 बिल पास, चर्चा की दृष्टि से अच्छा नहीं मानसून सत्र', किरेन रिजिजू ने बताया, लोकसभा और राज्यसभा में कितना काम करा पाई सरकार
केंद्रींय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार के मॉनसून सत्र में कुल 12 बिल पास हुए, लेकिन भारी हंगामे के कारण केवल एक ही पर चर्चा हो सकी।
- भारत
- 3 min read
Kiren Rijiju: संसद का मॉनसून सत्र इस बार भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। पूरे सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी और शोर-शराबा किया। इस दौरान स्पीकर लगातार सांसदों से शांति बनाए रखने और संसदीय नियमों के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील करते रहे, लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। गुरुवार को भी सदन का माहौल ऐसा ही अशांत बना रहा, जिसके चलते आखिरकार दोनों सदनों की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सत्र के समापन के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने बताया कि इस बार के मॉनसून सत्र में कुल 12 बिल पास हुए, लेकिन भारी हंगामे के कारण केवल एक ही पर चर्चा हो सकी।
चर्चा के लिहाज से अच्छा नहीं रहा मॉनसून सत्र- रिजिजू
रिजिजू ने कहा, ‘मॉनसून सत्र आज समाप्त हो गया है। हम दो तरीके से देखते हैं। काम काज की दृष्टी से बहुत अच्छा सत्र रहा। कुल 12 बिल हमने पारित किए हैं। चर्चा की दृष्टी से अच्छा नहीं हुआ है। लोकसभा में जितना समय आवंटित किया गया है उसमें सिर्फ 19% सफलता प्राप्त की है, जबकि राज्य सभा में 39% कामयाबी मिली।’
कुल 12 बिल पास हुए- किरेन रिजिजू
उन्होंने आगे कहा, ‘लोकसभा में 11 बिल बिना चर्चा के पास हुए, जबकि एक पर चर्चा हुई। यह परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के मुद्दे से जुड़ा था। सिर्फ इसी बिल पर लोकसभा में पूरी चर्चा हुई। इसी सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पास किया गया। राज्यसभा में बिल पर पूरी चर्चा हुई। सिर्फ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने वॉकआउट किया, जबकि बाकी विपक्षी पार्टियों ने चर्चा में हिस्सा लिया। इसके अलावा लोकसभा में कोई अच्छी चर्चा नहीं हुई, सिर्फ बिल पास हुए हैं। कुल 12 बिल पास हुए हैं। लेकिन हम चर्चा की दृष्टि से खुश नहीं हैं क्योंकि विपक्ष ने विशेषकर लोकसभा में ठीक से चर्चा नहीं करने दिया।’
'हंगामे के साथ भी मुद्दों पर चर्चा संभव, लेकिन…'
वे आगे कहते हैं, ‘हंगामा करते हुए भी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। पहले विपक्ष बातचीत में शामिल होता था, जबकि ये लोग विपक्ष में होने के बावजूद चर्चा से भागते हैं।’ उनके मुताबिक, विपक्षी सांसद केवल नारेबाजी के लिए संसद आए, जो संसदीय लोकत्रंत के लिए ठीक नहीं है।
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 13 August 2026 at 13:15 IST