शहादत को बड़ा सम्मान! कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदला, अब हुआ शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी; जानिए उनकी शौर्य गाथा
देश के लिए अपनी जान देने वालों के साहस का सम्मान करते हुए, भारतीय रेलवे ने जम्मू कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर "शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन कठुआ" कर दिया है।
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गुरसिमरन सिंह की रिपोर्ट
देश के लिए अपनी जान देने वालों के साहस का सम्मान करते हुए, भारतीय रेलवे ने जम्मू कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर "शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन कठुआ" कर दिया है। कैप्टन सुनील चौधरी ने ड्यूटी के दौरान 27 साल की उम्र में सर्वोच्च बलिदान दिया और उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांति-कालीन वीरता पुरस्कार, कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
PMO में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की कि कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम "शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन कठुआ" रखा गया है। सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह ने परिवार और स्थानीय लोगों की मांग रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने रखी थी जिसके बाद अब यह मांग पूरी हुई।
कौन थे कैप्टन सुनील कुमार चौधरी?
सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल पी.एल. चौधरी के बेटे, कैप्टन सुनील कुमार चौधरी को 10 दिसंबर 2004 को 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट की 7/11 गोरखा राइफल्स बटालियन में कमीशन किया गया था। गौरतलब है कि इस वीर जवान को असम के तिनसुकिया जिले के नाओपाथर गांव में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान वीरता दिखाने के लिए "सेना मेडल" से सम्मानित भी किया गया था।
26 जनवरी 2008 को कैप्टन सुनील कुमार चौधरी को रंगागढ़ गांव में छिपे 7 से 9 ULFA आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में नई खुफिया जानकारी मिली और वे तुरंत ऑपरेशन के लिए निकल पड़े। रंगागढ़ गांव पहुंचने पर, कप्तान सुनील ने एक योजना बनाई और लेफ्टिनेंट वरुण राठौर को तीन जवानों के साथ गांव के दाहिने हिस्से की घेराबंदी करने का निर्देश दिया, जबकि वे खुद आतंकवादियों का सामना करने के लिए आगे बढ़े।
छाती में गोली लगने के बावजूद भी जारी रखा ऑपरेशन
एक घर के अंदर मौजूद आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी और फिर आसपास के जंगल की ओर भागने की कोशिश की थी। कैप्टन सुनील ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए सामने से मोर्चा संभाला और भारी गोलीबारी के बीच भागते हुए आतंकवादियों का पीछा किया और शुरुआती मुठभेड़ में एक आतंकवादी को मार गिराया था।
इसके बाद हुई गोलीबारी के दौरान, कैप्टन सुनील की छाती के बाईं ओर गोली लगने से गंभीर चोट आई, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन जारी रखा और दूसरे आतंकवादी को गोली मारकर घायल कर दिया था। इसके बाद भले ही कैप्टन सुनील गंभीर रूप से घायल थे लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने जंगल में अंदर भागे हुए तीसरे आतंकवादी का पीछा किया और उस आतंकवादी को गोली मारकर ढेर कर दिया था। इससे खतरा पूरी तरह खत्म हो गया।
अपनी इस वीरता के लिए कैप्टन सुनील कुमार चौधरी को "सेना मेडल" से सम्मानित किया गया था। हालांकि इसके ठीक 24 घंटे बाद, कैप्टन सुनील कुमार चौधरी अपनी चोटों के कारण शहीद हो गए।
Published By : Kritarth Sardana
पब्लिश्ड 18 July 2026 at 10:34 IST