अपडेटेड 12 March 2026 at 16:45 IST

Israel Iran War: छात्र, श्रद्धालु और बिजनेसमैन... ईरान में 9000 भारतीय फंसे हुए हैं, वो किस हालत में हैं, कैसे वापस आएंगे? MEA ने दिया जवाब

Israel Iran War: MEA ने बताया कि ईरान में करीब 9000 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। सरकार उन भारतीयों की मदद कर रही है जो अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते निकल रहे हैं।

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Randhir Jaiswal | Image: X- Randhir Jaiswal

Israel Iran War: भारतीय विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर गुरूवार को बड़ा अपडेट दिया। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि ईरान में करीब 9000 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सरकार हर संभव मदद कर रही है।

ईरान में फंसे भारतीयों को निकाल रही सरकार 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि लगभग 9000 भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र, व्यापारी, नाविक और तीर्थयात्री शामिल हैं। सरकार ने इनके सुरक्षित वापसी के लिए कई कदम उठाए हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत सरकार नागरिकों की वीजा, जमीनी सीमा पार करने और व्यावसायिक उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है। 

साथ ही सरकार अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते यात्रा करने वालों की भी मदद कर रही है। इसके लिए पहले से ही एडवाइजरी जारी की गई है। इससे कई नागरिकों को तेहरान से सुरक्षित ईरान छोड़ने और सुरक्षित घर लौटने में मदद मिली है। वहीं, कई नागरिकों को तेहरान से सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है। 

खुद विदेश मंत्री कर रहे बात 

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि लोगों के रेस्क्यू और सुरक्षा के लिए खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष के साथ 3 बार बातचीत की। उनका उद्देश्य है कि नागरिकों के सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 

खाड़ी देशों के नेताओं से PM ने की बात 

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई खाड़ी देशों के नेताओं से बात की है। इस दौरान उन्होंने बातचीत और कूटनीति की जरूरत पर जोर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने नागरिक सुरक्षा की अहमियत पर जोर दिया और भरोसा दिलाया कि भारतीय समुदाय की भलाई सबसे अहम प्राथमिकता बनी हुई है। 

पड़ोसी देशों की भारत करेगा मदद

युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिसका असर भारत और पड़ोसी देशों पर भी हो रहा है। बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने भारत से डीजल की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया है। भारत 2017 से बांग्लादेश को पाइपलाइन के जरिए डीजल भेज रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देशों की मदद करने से पहले सरकार अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखेगी। 

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 12 March 2026 at 16:45 IST