अपडेटेड 1 March 2026 at 08:36 IST
Vande Bharat Sleeper Train: इसी महीने पटरियों पर उतरेगी देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर, जानें क्या होगा रूट
Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे यात्रियों को शानदार तोहफा देने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इसी महीने पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। पहली स्लीपर ट्रेन की शानदार सफलता के बाद, रेलवे अब लंबी दूरी के यात्रियों के लिए इस आधुनिक ट्रेन का विस्तार कर रहा है।
Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इसी महीने पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है। पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पहले से ही हावड़ा-गुवाहाटी मार्ग पर चल रही है, जिसे यात्रियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है।
लवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2026 में कुल 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह नई ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, जिसमें उन्नत सस्पेंशन सिस्टम, आरामदायक बर्थ और एआई-आधारित कैमरे शामिल होंगे। यात्रियों को विमान जैसी सुविधा देने के लिए ट्रेन के गलियारों में स्मार्ट सेंसर लाइटें भी लगाई गई हैं। यह कदम लंबी दूरी की रात की यात्रा को अधिक आरामदायक और तेज़ बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
दूसरी वंदे भारत स्लीपर की रूट जानिए
आधिकारिक तौर पर अभी तक रूट की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रेलवे बोर्ड के सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के अनुसार, दूसरी ट्रेन के लिए देश के सबसे व्यस्त रेलवे कॉरिडोर्स पर विचार किया जा रहा है। संभावित रूट्स में शामिल हैं।
दिल्ली-हावड़ा- यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए यह एक प्रमुख दावेदार है।
दिल्ली-मुंबई- देश के दो सबसे बड़े महानगरों को जोड़ने वाला यह मार्ग हाई-स्पीड यात्रा के लिए आदर्श है।
चेन्नई-बेंगलुरु-मुंबई- दक्षिण और पश्चिम भारत को जोड़ने के लिए यह महत्वपूर्ण मार्ग है।
बोलस्टर कोच से यात्रा होगा आरामदायक
भारतीय रेलवे की तकनीकी संरचना में 'बोलस्टर कोच' तकनीक एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह तकनीक ट्रेन की बोगी और डिब्बे के बीच एक बेहद मजबूत और भरोसेमंद संबंध स्थापित करती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत ट्रेन की स्थिरता को बढ़ाना है। जब ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे या उससे भी अधिक की तेज रफ्तार से दौड़ती है, तो यह तकनीक झटकों और कंपन को काफी हद तक सोख लेती है। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलता है; उन्हें एक अत्यंत स्मूथ और स्थिर सफर का अनुभव होता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 1 March 2026 at 08:33 IST