Independence Day 2026: 'ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों को अंजाम भुगतने का कड़ा संदेश दिया', जानिए राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन की 10 बड़ी बातें
80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा, अर्थव्यवस्था और 'विकसित भारत' के निर्माण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। आइए उनके संबोधन की बड़ी बातें क्या थी? इसके बारे में जानते हैं।
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80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित करते हुए भारत की प्रगति, युवा क्षमता, महिला सशक्तिकरण और वैश्विक स्तर पर देश की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में दृढ़ता और गति के साथ आगे बढ़ रहा है।
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और युवा शक्ति
राष्ट्रपति ने सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं छात्रों के उज्ज्वल भविष्य का प्रवेश द्वार हैं। सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। देश की 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा शक्ति भारत की सबसे अमूल्य धरोहर है, जो स्टार्टअप्स और नवाचार के माध्यम से विकास को गति दे रही है।
'महिला-नेतृत्व वाला विकास'
संबोधन का एक मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण रहा। राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत में विकास का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। 3 करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने का शुरुआती लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है और अब अगले 3 करोड़ का नया लक्ष्य रखा गया है।इस योजना के तहत वित्तीय लाभ पाने वाले कुल उद्यमियों में से लगभग दो-तिहाई महिलाएं हैं।'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
आर्थिक मजबूती और वैश्विक पहचान
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर औसत वैश्विक वृद्धि दर से दोगुनी से भी अधिक रहने का अनुमान है। भारत की विदेश नीति शांति, सहयोग और संवाद पर आधारित है। भारत आज 'ग्लोबल साउथ' की सशक्त आवाज और दुनिया में एक संतुलन बनाने वाले सेतु के रूप में उभरा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक नीतियों और आंतरिक शांति पर बात की।आतंकवाद के खिलाफ कड़े संदेश और नक्सलवाद के प्रभावी खात्मे ने देश में सुरक्षित माहौल तैयार किया है। मराठा सैन्य वास्तुकला के 12 किलों और भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
राष्ट्रपति के संबोधन के 10 मुख्य बिंदु
परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए बड़े प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं।
'अंत्योदय' और 'वयम राष्ट्रे जागरियाम' के मूल मंत्र के साथ भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर अग्रसर है।
भारत की 65% आबादी 35 वर्ष से कम है, जो वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाती है।
प्रथम चरण में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पूरा हुआ; अब अगले 3 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित।
विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को ऐतिहासिक लोकतांत्रिक उपलब्धि बताया।
वैश्विक मंदी और संकटों के बीच भारत की विकास दर वैश्विक औसत से दोगुनी रहने का अनुमान।
दशकों पुरानी नक्सल समस्या का समाधान कर प्रभावित क्षेत्रों में सर्व-समावेशी विकास पहुंचाना एक बड़ी सफलता।
सारनाथ और मराठा साम्राज्य के 12 किलों का UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल होना राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय।
नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और निष्पक्ष विदेश नीति के माध्यम से भारत विश्वबंधु की भूमिका में।
न्यायिक प्रणाली से जुड़े तंत्र का दायित्व है कि समाज के वंचित वर्ग को सम्मानजनक और समयबद्ध न्याय मिले।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 14 August 2026 at 21:19 IST