Census 2027: बिना शादी के रह रहे हैं साथ? 'स्थिर' है रिश्ता तो जनगणना में 'शादीशुदा' गिने जाएंगे लिव-इन कपल

Live-in couples in Census: लिव इन कपल्स को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। अगर बिना शादी के लिव इन में रह रहे कपल्स का रिश्ता स्टेबल है, तो उन्हें भी शादीशुदा यानी मैरिड के तौर पर ही गिना जाएगा।

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लिव इन कपल्स पर फैसला | Image: X

India Census 2027: देश में जनगणना होने जा रही है। सरकार ने जनगणना 2027 को दो चरणों में कराने का फैसला किया है। इसका पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है और यह 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिसकी लिस्ट भी जारी कर दी गई है। इस बीच, लिव इन रिलेशनशिप को लेकर एक ऐसा फैसला लिया गया है, जो चर्चाओं में है।

इसके मुताबिक, अगर अब कोई कपल बिना शादी के एक ही घर में 'स्टेबल रिलेशनशिप' में रह रहा है, तो उसे शादीशुदा माना जाएगा। फैसला कपल के खुद के बयान के आधार पर लिया जाएगा।

लिव इन कपल्स पर फैसला

दरअसल, जनगणना से जुड़ी ऑफिशियल वेबसाइट के FAQ यानि अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के सेक्शन में एक सवाल था। सेक्शन में प्रश्न था, "क्या लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे जोड़े को विवाहित माना जाएगा?" जवाब में कहा गया कि अगर कपल अपने रिश्ते को एक ‘स्थिर बंधन’ मानते हैं तो ऐसे में उन्हें शादीशुदा माना जाएगा।

अधिकारियों की ओर से साफ किया गया कि अगर व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी भर रहा हो या फिर एन्यूमरेटर घर आकर डेटा कलेक्ट कर रहे हों, इन दोनों ही स्थितियों में कपल की खुद को घोषणा को ही इसका आधार माना जाएगा। यानी कोई कपल अपने रिश्ते को स्थिर मानता हैं, तो उन्हें विवाहित श्रेणी में गिना जाएगा।

पहले भी होता था ऐसा, लेकिन…

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में पहले भी यही प्रैक्टिस अपनाई जाती थी, लेकिन इस विषय पर पहली बार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट निर्देश दिए गए। पिछली जनगणनाओं में भी लिव इन में रहने वाला कपल खुद को शादीशुदा बताता था, तो उसे उसी रूप में रिकॉर्ड किया जाता था।

इस बार ऑनलाइन जानकारी देने की भी सुविधा

इस बार जनगणना में पहली बार लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर भरने की सुविधा भी दी गई है। सरकार ने  'सेल्फ-एन्युमरेशन' का विकल्प चुनने वालों के लिए एक पोर्टल भी खोला है।

पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसमें अधिकारी घर-घर जाकर या फिर ऑनलाइन माध्यम से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, जिससे सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 30 March 2026 at 17:07 IST