‘मैं वापस आ गया हूं’ : उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए यहां सिविल सचिवालय पहुंचे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए यहां सिविल सचिवालय पहुंचे। यह केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षण था। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया तथा उन्होंने (मुख्यमंत्री ने) सलामी गारद का निरीक्षण किया।
जम्मू-कश्मीर का दर्जा राज्य से घटाकर केंद्र शासित प्रदेश किये जाने के बाद यहां के पहले मुख्यमंत्री बने अब्दुल्ला अपने कार्यालय कक्ष में पहुंचे जहां औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने से पहले कर्मचारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
अब्दुल्ला ने अपने कार्यालय की कुर्सी पर बैठे हुए फोटो के साथ ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं वापस आ गया हूं।”
पहली बार 2009 में बने थे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर जब एक पूर्ण राज्य था तब 2009 से 2014 के बीच भी अब्दुल्ला मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने अपने नए प्रशासन की रूपरेखा तय करने के लिए प्रशासनिक सचिवों के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक में उपमुख्यमंत्री सुरेन्द्र कुमार चौधरी के साथ-साथ मंत्री सकीना मसूद इटू, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा भी उपस्थित थे।बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और सभी विभागों के प्रशासनिक सचिव मौजूद थे।
डुल्लू ने नए मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को प्रशासन का पूरा सहयोग देने की बात कही।
डुल्लू ने कहा, “हम सरकार के दृष्टिकोण को पूरा करने और लोगों की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।”
अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने में अधिकारियों की भूमिका की प्रशंसा की।
हमें आगे बढ़कर उन उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए जो हमसे की गयी हैं- उमर
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र के लोगों ने लोकतंत्र, सरकार और इसकी संस्थाओं में बहुत भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमें इस अवसर पर आगे बढ़कर उन उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए जो हमसे की गयी हैं।”
शासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने जनता को सर्वोपरि रखने की आवश्यकता दोहराई तथा इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार की प्राथमिक भूमिका नागरिकों की सेवा करना तथा उनकी चिंताओं का समाधान करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में जनता और सरकार के बीच खाई पैदा हो गई है, लेकिन उन्होंने इस दूरी को कम करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
हमारे प्रशासन का दृष्टिकोण लोगों के अनुकूल होगा- उमर
उन्होंने कहा, “हमारे प्रशासन का दृष्टिकोण लोगों के अनुकूल होगा। हमने सिविल सचिवालय में सकारात्मक सोच के साथ प्रवेश किया है, जिसका ध्यान जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित है।”
अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों और सरकार के बीच की खाई को पाटना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “इसी कारण से पूरे भारत में लोकतांत्रिक सरकारों को प्राथमिकता दी जाती है और हम लोगों को सरकार और उसकी संस्थाओं के करीब लाने के लिए अथक प्रयास करेंगे।”
अब्दुल्ला ने अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई तथा पूर्ण सहयोग का वचन दिया तथा बदले में भी ऐसा ही सहयोग मिलने की अपेक्षा की।
Published By : Deepak Gupta
पब्लिश्ड 16 October 2024 at 21:01 IST