अपडेटेड 24 March 2026 at 17:40 IST

Harish Rana Death: हरीश राणा को दर्द भरी सांसों से मिली मुक्ति; AIIMS में निधन; 13 साल कोमा में रहने के बाद SC ने दी थी इच्‍छामृत्यु

गाजियाबाद के हरीश राणा ने मंगलवार यानी आज दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

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Harish Rana, First in India To Be Allowed Passive Euthanasia, Breathes His Last At AIIMS Delhi | Image: X

Harish Rana: 13 सालों से बिस्तर पर खामोश पड़े हरीश राणा ने आज, 24 मार्च 2026 को दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी साझा की है। 

सालों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। अनुमति मिलने के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाए गए। इस प्रोसेस में 10 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम लगी हुई थी। 

हरीश को दिया गया पैसिव यूथेनेशिया 

एम्स में भर्ती हरीश को पैसिव यूथेनेशिया दिया गया था। इसका अर्थ यह है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए दिया जा रहा लाइफ सपोर्ट या इलाज रोक दिया जाए, जिससे की ऐसा करने से मरीज का प्राकृतिक रूप से निधन हो सके। दूसरी तरफ, हरीश के माता-पिता और अन्य परिजनों को काउंसिलिंग दी गई।

अदालत के फैसले के बाद मां ने क्या कहा था?

अदालत के ऐतिहासिक फैसले के बाद हरीश राणा की मां ने भारी मन से कहा था कि बेटे के इलाज के लिए हर मुमकिन कोशिश की। बड़े-बड़े डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन कुछ सुधार नहीं हुआ। अब 13 साल बाद सभी उम्मीदें लगभग खत्म हो गई। भगवान से सिर्फ यही विनती है कि बेटे को इस दर्द से जल्द मुक्ति दे। 

एक हादसे ने छीनी परिवार की खुशियां

हरीश राणा ने अपने इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करने के लिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। साल 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन वह अपनी बहन से मोबाइल पर बात कर रहे थे, तभी वो पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए। डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित हैं। तभी से वह पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में पड़े रहे। 13 सालों तक हरीश राणा की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। वह बिस्तर पर जिंदा लाश की तरह पड़े रहे।

परिवार ने क्यों की इच्छामृत्यु की मांग?

बिस्तर पर पड़े रहने के कारण हरीश के शरीर पर बेडसोर्स (गहरे घाव) हो गए। हरीश को इस तरह दर्द में तड़पते देखना परिवार के लिए मानिसक रूप से बेहद मुश्किल हो गया। 

सालों तक हरीश राणा की देखभाल और सेवा करने के बाद परिवार ने अदालत का रुख किया।  अदालत ने इस पहलू को बेहद संवेदनशील माना। फैसला देने से पहले जज ने खुद हरीश राणा के परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद जज भी फैसला सुनाते वक्त भावुक हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने हरीश राणा के माता-पिता की याचिका पर पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी।


 

(Note: यह एक ब्रेकिंग स्टोरी है। अधिक जानकारी के साथ अपडेट हो रही है)

Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 24 March 2026 at 17:12 IST