सिरोही के गणेश देवासी: जिनके हाथ नहीं, लेकिन हौसले आज भी आसमान छूते हैं
Ganesh Dewasi Sirohi: राजस्थान के सिरोही जिले के 16 वर्षीय गणेश देवासी ने 8 साल पहले करंट की वजह से अपने दोनों हाथ खो दिए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पैरों को अपनी ताकत बनाकर आर्चरी, कैरम और अद्भुत पेंटिंग सीखी।
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विशाल कैथवाल
सिरोही/सिरोड़ी: कभी-कभी जिंदगी इंसान की ऐसी परीक्षा लेती है, जहां से लौटना आसान नहीं होता। लेकिन कुछ लोग दर्द को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लेते हैं। सिरोही जिले के छोटे से गांव सिरोड़ी का 16 वर्षीय गणेश देवासी आज ऐसी ही जीवंत मिसाल बन चुका है।
करीब आठ साल पहले एक दर्दनाक हादसे ने गणेश की जिंदगी बदल दी। बिजली के करंट की चपेट में आने से उसने अपने दोनों हाथ खो दिए। उस मासूम उम्र में, जब बच्चे खेलते-कूदते हुए अपने सपनों को आकार देना शुरू करते हैं, तब गणेश की दुनिया अचानक अंधेरे में डूब गई।
परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता की आंखों में अपने बेटे का भविष्य लेकर चिंता थी, लेकिन शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा एक दिन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन जाएगा।
गणेश ने हालात के सामने झुकने से इनकार कर दिया। बिना हाथों के उसने जिंदगी को नए तरीके से जीना सीखा। धीरे-धीरे उसने अपने पैरों और हौसलों को ही अपनी ताकत बना लिया। आज वह आर्चरी सीख रहा है, कैरम खेलता है और ऐसी शानदार पेंटिंग बनाता है जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।
उसकी मेहनत और कला ने उसे राज्य स्तर तक पहचान दिलाई। पेंटिंग प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गणेश को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। यह सम्मान सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस संघर्ष, आत्मविश्वास और जिद का सम्मान था जिसने हर मुश्किल को पीछे छोड़ दिया।
गणेश के पिता ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद परिवार ने कभी गणेश का हौसला टूटने नहीं दिया। वहीं गणेश ने भी अपने जीवन से यह साबित कर दिया कि इंसान की असली ताकत उसके हाथों में नहीं, बल्कि उसके इरादों में होती है।
आज सिरोड़ी गांव का यह बेटा हर उस व्यक्ति को नई उम्मीद दे रहा है जो जिंदगी की मुश्किलों से घबरा जाता है। गणेश की कहानी बताती है कि अगर इंसान हार मानने से इनकार कर दे, तो हालात भी एक दिन उसके आगे झुक जाते हैं। गणेश देवासी आज संघर्ष नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और जिद का दूसरा नाम बन चुके हैं।
Published By : Shashank Kumar
पब्लिश्ड 22 May 2026 at 16:20 IST