एक प्रधानमंत्री के पत्राचार को देश के सामने क्यों नहीं लाया जाना चाहिए: शेखावत

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को कहा कि ‘बेहद निजी पत्रों’ को छोड़कर, एक प्रधानमंत्री के पत्राचार को देश के सामने क्यों नहीं लाया जाना चाहिए?

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Gajendra Singh Shekhawat | Image: PTI

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित निजी दस्तावेजों के संग्रह को व्यापक रूप से सुलभ बनाने की मांग के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को कहा कि ‘बेहद निजी पत्रों’ को छोड़कर, एक प्रधानमंत्री के पत्राचार को देश के सामने क्यों नहीं लाया जाना चाहिए?

नेहरू मध्य दिल्ली में स्थित तीन मूर्ति भवन में रहते थे। इस भवन को उनकी मृत्यु के बाद नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) में बदल दिया गया था जिसमें पुस्तकों और दुर्लभ अभिलेखों का समृद्ध संग्रह है।

एनएमएमएल सोसाइटी ने जून 2023 में आयोजित अपनी विशेष बैठक में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) सोसाइटी रखने का संकल्प लिया था।

पीएमएमएल सोसाइटी के एक सदस्य ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से नेहरू से संबंधित निजी दस्तावेजों के संग्रह को व्यापक रूप से सुलभ बनाने के लिए कहा है, जिन्हें तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के कहने पर 2008 में तत्कालीन एनएमएमएल से वापस ले लिया गया था।

इस मुद्दे पर पूछे जाने पर शेखावत ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘यदि देश के प्रधानमंत्री ने किसी को पत्र लिखा है, तो बेहद निजी पत्रों को छोड़कर, यह देश के सामने क्यों नहीं आना चाहिए।’’

अहमदाबाद के एक स्थानीय कॉलेज में इतिहास पढ़ाने वाले रिजवान कादरी ने सितंबर में भी कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नेहरू से संबंधित उन निजी दस्तावेजों तक भौतिक या डिजिटल पहुंच की अनुमति देने का अनुरोध किया था, जो उनके पास हैं।

कादरी ने कहा था कि इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन और अल्बर्ट आइंस्टीन समेत अन्य हस्तियों के बीच पत्राचार से संबंधित रिकॉर्ड हैं।

पीएमएमएल संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है।

बातचीत के दौरान, संस्कृति और पर्यटन मंत्री शेखावत से एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी द्वारा 10 मार्च को लोकसभा में एएसआई को लेकर लगाये गये आरोपों के बारे में भी पूछा गया।

ओवैसी ने पूरक प्रश्न पूछते हुए आरोप लगाया था, ‘‘पिछले 50 साल से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।’’

उन्होंने पूछा, ‘‘एएसआई को ‘डिटॉक्सिफाई’ (विषमुक्त) करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी। क्या सरकार सुनिश्चित करेगी कि एएसआई संविधान के धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद के सिद्धांत के साथ काम करे?’’

आरोपों को खारिज करते हुए शेखावत ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार किसी विशेष समुदाय को विशेषाधिकार दिए बिना ‘‘सबका साथ, सबका विकास’’ के दृष्टिकोण पर काम कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कुछ ऐसे लोग या वर्ग हैं जो 55 वर्षों से तुष्टीकरण से फायदा उठाते रहे हैं।

शेखावत ने कहा कि सरकार पिछले लगभग 11 वर्षों से ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’’ के मंत्र के साथ काम कर रही है, लेकिन कुछ विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग जो (तुष्टीकरण से) लाभान्वित हुए हैं, वे अभी भी ‘‘ऐसे मुद्दे देखते हैं’’।

शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों के दौरान भारत के विकास की गति के कारण भारत के बारे में दुनिया का नजरिया बदल गया है।

शेखावत ने भारत में विदेशी पर्यटकों की आमद को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा किये गये विभिन्न प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें पर्यटन अवसंरचना विकास योजना के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता के तहत कार्यक्रम और वित्तीय सहायता शामिल है।

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Published By : Deepak Gupta

पब्लिश्ड 12 March 2025 at 21:11 IST