NCERT Syllabus: कक्षा 9वीं के स्टूडेंट्स पहली बार पढ़ेंगे 'इमरजेंसी', सामाजिक विज्ञान के सिलेबस में नया बदलाव
NCERT ने कक्षा नौवीं के लिए सामाजिक विज्ञान के सिलेबस में कई बड़े बदलाव किए हैं। किताब में आपातकाल जैसे नए अध्याय को पहली बार कक्षा 9वीं की पाठ्यपुस्तक में जोड़ा है।
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NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं के Social Science के पाठ्यक्रम में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF 2023) के दिशानिर्देशों के तहत NCERT ने अंडरस्टैंडिंग सोसायटी इंडिया एंड बियांड (Understanding Society: India and Beyond) शीर्षक से एक नई पुस्तक जारी की है।अब तक छात्रों को इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के लिए अलग-अलग किताबें पढ़नी पड़ती थीं। लेकिन नए सत्र से इन सभी विषयों को सिलेबस में कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि इस नई किताब में क्या खास है और कौन से बड़े बदलाव किए गए हैं।
इतिहास के पाठ्यक्रम से वैश्विक क्रांतियों की विदाई
इस नई पुस्तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव इतिहास के खंड में देखने को मिला है। कक्षा नौवीं के पारंपरिक पाठ्यक्रम से कई वैश्विक और यूरोपीय ऐतिहासिक घटनाओं को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब छात्रों को निम्नलिखित अध्याय नहीं पढ़ने होंगे। जैसे कि
फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution),यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति,नाजीवाद और हिटलर का उदय,वन समाज और उपनिवेशवाद, आधुनिक विश्व में चरवाहे/पशुपालक
भारतीय गौरव और प्राचीन इतिहास पर विशेष ध्यान
विदेशी क्रांतियों को हटाने के बाद अब पुस्तक की शुरुआत आदिमानवों के विकासक्रम और सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता से होती है। इसके अलावा भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देते हुए वैदिक युग, महाजनपदों का उदय, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और महाभारत में वर्णित राजा के कर्तव्यों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। साथ ही, प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति और भूमिका पर भी विशेष अध्याय जोड़े गए हैं।
पहली बार पाठ्यक्रम में 'आपातकाल' और समकालीन मुद्दे होंगे
आधुनिक भारतीय राजनीति को समझने के लिए पहली बार कक्षा नौवीं के छात्रों को साल 1975 में देश में लगाए गए 'इमर्जेंसी' (आपातकाल) के काले दौर के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए Financial Literacy और Disaster Management जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
भूगोल और अर्थशास्त्र में बदलाव
भूगोल के पारंपरिक स्वरूप को बदलते हुए 'भारत: आकार और स्थिति', 'प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्यजीव' और 'भारत की भौतिक संरचना' को अलग-अलग पढ़ाने के बजाय अब एक ही यूनिट में कर दिया गया है। इसके अलावा 'जनसंख्या' के अध्याय को हटाकर, पर्यावरण संकट जैसे कि साल 2025 की पंजाब बाढ़ और कार्बन फुटप्रिंट जैसे नए और विषयों को जोड़ा गया है।
अर्थशास्त्र के पुराने ढर्रे को बदलते हुए 'पालमपुर गांव की कहानी', 'गरीबी एक चुनौती', और 'खाद्य सुरक्षा' जैसे अध्यायों को हटा दिया गया है। इनकी जगह अब छात्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 'स्वयं का व्यवसाय शुरू करना' और 'स्टार्टअप' जैसी आधुनिक व चैप्टर को शामिल किया गया है, ताकि छात्र भविष्य के लिए तैयार हो सकें।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 25 June 2026 at 11:31 IST