'आरक्षण विरोधी तत्वों को संरक्षण ना दें, दलित हमेशा से जातिवाद का शिकार...', मायावती की सरकार को नसीहत; राहुल के दोहरे रुख पर भी उठाए सवाल
'आरक्षण सुधार' आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। अब बसपा सुप्रीमो मायावती की इस पर पहली प्रतिक्रिया आई है।
- भारत
- 3 min read
'आरक्षण सुधार' आंदोलन का मामला धीरे-धीरे तुल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश में ऐसे लेकर राजनीति गरमा गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में SC, ST और OBC समाज को संविधान में दिए गए आरक्षण के विरोध में हुए प्रदर्शन और 'आरक्षण सुधार' आंदोलन पर बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे समतामूलक समाज तथा विकसित और सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक प्रयासों को आघात पहुंचे।
अपने X अकाउंट पर मायावती ने लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर केंद्र सरकार को नसीहत दी है कि आरक्षण विरोधी तत्वों को संरक्षण ना दें तो कांग्रेस राहुल गांधी के दोहरे रुख पर सवाल भी उठाया है।
मायावती ने आरक्षण विवाद पर क्या है?
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई मांग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुंचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहां तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष खर्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से जमीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, गरीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालांकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गांधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बगल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहां पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
यह भी पढ़ें: आरक्षण को लेकर अखिलेश पर बरसे राजभर; जानें क्या कहा
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 23 August 2026 at 13:12 IST