डिजिटल मर्डर: ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग ने छीन ली युवक की जिंदगी, फर्जी क्राइम ब्रांच अफसर बनकर करते थे वसूली, पुलिस ने किया खुलासा
ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग गिरोह के शिकार हुए ज्ञानदास नामक युवक ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली, जिसे पुलिस ने 'डिजिटल मर्डर' करार दिया है।
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UP NEWS: प्रतापगढ़ पुलिस ने साइबर अपराधियों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर वसूली करता था। इस गिरोह के शिकार हुए ज्ञानदास नामक युवक ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली, जिसे पुलिस ने 'डिजिटल मर्डर' करार दिया है।
मामले की जानकारी होने पर पुलिस अधीक्षक डा.अनिल कुमार ने अपनी स्पेशल टीमों को लगाकर राजफास किया और अभियुक्तों को धर दबोचा।
कैसे बनाया ब्लैकमेलिंग का शिकार?
मृतक ज्ञानदास के भाई प्रेमदास ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि अज्ञात लोगों ने उनके भाई को डिजिटल माध्यम से फंसाकर पैसे ऐंठे। बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच में सामने आया कि ज्ञानदास ने बार-बार अलग-अलग लोगों को ऑनलाइन भुगतान किया था । ब्लैकमेलरों ने उसे लगातार कॉल कर धमकाया, झूठे मुकदमों और जेल भेजने का डर दिखाकर अवैध वसूली की। जब ज्ञानदास के पास पैसे खत्म हो गए, तो उसने अपने घर के गहने तक गिरवी रख दिए और उधारी लेकर भी आरोपियों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए। मानसिक तनाव और आर्थिक शोषण से तंग आकर उसने 30 जनवरी 2025 को आत्महत्या कर ली । इस संबंध में थाना फतनपुर में धारा 61(2), 108, 308(5), 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस पंजीकृत किया गया था ।
फर्जी क्राइम ब्रांच के नाम पर ठगी और ब्लैकमेलिंग
7 फरवरी 2025 को उपनिरीक्षक शैलेश यादव ने टीम के साथ अभियुक्तों की तलाश में सर्विलांस कार्यालय प्रतापगढ़ पहुंचे। जांच में मोबाइल नंबर 8173063758 की डिटेल खंगाली गई, जिससे पता चला कि यह नंबर रोहित प्रजापति, निवासी भीमसेन, जनपद कानपुर नगर, के नाम पंजीकृत था। पुलिस ने तुरंत लोकेशन ट्रैक कर कानपुर नगर में छापा मारा। सर्विलांस टीम के आरक्षी सनोज कुमार की मदद से पुलिस ने भीमसेन से रेवरी जाने वाले रोड के किनारे खेल मैदान के पास चार संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जबकि चार अन्य मौके से फरार हो गए। गिरफ्तार अभियुक्तों में रोहित प्रजापति, अभिमत सिंह चौहान और वीर प्रताप सिंह और एक बाल अपराधी शामिल है। पुलिस को मौके से फर्जी क्राइम ब्रांच आईडी कार्ड, कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई।
गिरफ्तार आरोपियों से हुई बरामदगी
फर्जी क्राइम ब्रांच आईडी कार्ड जिनसे अभियुक्त खुद को पुलिस अधिकारी दिखाकर लोगों को डराते थे। मोबाइल फोन और सिम कार्ड जिनसे फर्जी नंबरों से लोगों को धमकाने और ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड – फोनपे, पेटीएम और अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे ऐंठे गए। गहनों के बिल और बैंक रसीदें, 16,030 रुपये भी बरामद हुए हैं।
Published By : Deepak Gupta
पब्लिश्ड 10 February 2025 at 23:42 IST