अपडेटेड 25 February 2026 at 13:01 IST
'बेटे ने बाप को मार डाला, सास-दामाद संग भाग गई, ऐसे समाज का निर्माण किसने किया?', रिपब्लिक के सनातन सम्मेलन में बोले देवकीनंदन ठाकुर
Devkinandan Thakur: कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आजकल के समय की ये सबसे बड़ी समस्या है कि मैं और मेरे परिवार, मैं दूसरों के बारे में नहीं सोचता। ये धर्म नहीं है। ये धर्म हो ही नहीं सकता।
Sanatan Sammelan: रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क में आज (25 फरवरी) आयोजित 'सनातन सम्मेलन' कार्यक्रम में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि जब तक हम यह नहीं जाएंगे कि धर्म क्या है, तब तक न तो हम धर्म के पथ चल पाएंगे और न ही धर्म की रक्षा कर पाएंगे। धर्म वो नहीं है जो किसी के कहने पर स्वीकार किया जाए, धर्म वो नहीं है कि आज मुझे किसी ने कह दिया और वो मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैंने छोड़ दिया। धर्म का मतलब है, जो शास्त्रों में लिखा है उसे स्वीकार किया जाए।
देवकीनंदन ठाकुर ने विभिन्न धर्मों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जो मेरे मुताबिक चले वो धर्म है। लोग मानते हैं कि सनातन धर्म जो हमारे मन में आ जाए, वो है, जिसके दुष्परिणाम भी देखने मिलते हैं।
उन्होंने कई उदाहरणों का जिक्र करते हुए आगे कहा कि गुरुग्राम में जो अभी हुआ, 19 साल की लड़की के साथ उसके लिव इन पार्टनर ने उसके अंगों को जलाकर जो किया। दुष्परिणा ये है कि अभी लखनऊ में एक बेटे ने अपने ही बाप को टुकड़े-टुकड़े करके काटकर मार दिया। एक महिला अपनी बेटे की शादी करवाने की तैयारी कर रही थी और वो अपने ही भांजे को लेकर चली गई। एक महिला अपने बेटी के लिए लड़का ढूंढने के लिए गई थी और उसी दामाद को लेकर फरार हो गई। बाद में वही अपने दामाद को छोड़कर अपने बहनोई संग फिर फरार हो गई।
युवाओं को दी ये सलाह
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि ऐसे समाज का निर्माण किया किसने है? उन लोगों ने किया है, जो धर्म को अपने मुताबिक समझते हैं कि हम जो कर रहे हैं वही धर्म है। अगर धर्म को जानना है तो भगवान श्रीराम को जानो। युवाओं से हमारा आग्रह है कि अगर आप वाकई मानव जीवन के महत्व को समझना चाहते हैं, तो राम को जानो, तो सीता को जाने, सावित्री को जाने, अनुसूया को जाने। तब आपको पता चलेगा कि सनातन धर्म कहते किसको हैं।
देवकीनंद ठाकुर ने बताया क्या है सनातन धर्म?
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म 'मैं और मेरा परिवार' नहीं है। आजकल के समय की ये सबसे बड़ी समस्या है कि मैं और मेरे परिवार, मैं दूसरों के बारे में नहीं सोचता। ये धर्म नहीं है। ये धर्म हो ही नहीं सकता। दूसरों को सुख देना ही सबसे बड़ा धर्म है और दूसरों को दुख देना ही सबसे बड़ा पाप है।
देवकीनंदन ने आगे कहा कि स्वार्थी आदमी न अपना, न अपने परिवार का और न ही समाज का भला कर सकता। वो सबको लेकर डुब जाएगा। दुर्भाग्य इसी बात का है कि हमारा समाज स्वार्थी होता जा रहा है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 25 February 2026 at 13:01 IST